चाईबासा: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से पूर्व डॉ. भाग्यश्री कर ने समाज से अपील करते हुए कहा कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभवों को संवेदनशीलता से सुनना ही वास्तविक बदलाव की शुरुआत है। चाईबासा स्थित सदर अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भाग्यश्री कर ने 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के परिप्रेक्ष्य में लोगों से मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम “जीवन के अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाज, वास्तविक बदलाव” तय की गई है, जो यह संदेश देती है कि मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे व्यक्तियों की भावनाओं और आवाजों को समझना तथा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं व निर्णयों में प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।

डॉ. भाग्यश्री कर के अनुसार, भागदौड़ भरी जीवनशैली, पारिवारिक दबाव, अकेलापन, नशा और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग आज लोगों के मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। समाज में व्याप्त भ्रांतियों और झिझक के कारण कई लोग अपनी समस्या खुलकर साझा नहीं कर पाते। ऐसे में किसी का मजाक उड़ाने या उसे कमजोर समझने के बजाय बिना किसी पूर्वाग्रह के उसकी बात सुनना मदद की पहली सीढ़ी साबित होता है।
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई। लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, एकाकीपन, नींद या भूख में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करते हुए समय पर विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने की सलाह दी गई है। डॉ. भाग्यश्री कर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर एक निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि परिवार, स्कूल और कार्यस्थल पर एक भयमुक्त वातावरण बन सके जहां लोग अपनी बात सहजता से रख सकें।


