धर्मांतरण और आदिवासी आरक्षण पर फिर छिड़ी बहस, मंत्री के जाति प्रमाण पत्र को हाई कोर्ट में चुनौती

झारखंड हाई कोर्ट में मंत्री के जाति प्रमाण पत्र पर दायर याचिका के बाद धर्मांतरण, आदिवासी पहचान और आरक्षण अधिकारों को लेकर चंपाई सोरेन का बयान चर्चा में है।

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झारखंड: झारखंड में धर्मांतरण, आदिवासी पहचान और आरक्षण के अधिकार को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। झारखंड हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में एक मंत्री के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए सवाल उठाया गया है कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद अनुसूचित जनजाति का लाभ कैसे मिल सकता है। याचिका के बाद राज्य में संवैधानिक अधिकार, आदिवासी अस्मिता और धर्मांतरण के मुद्दे पर नई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले में चंपाई सोरेन ने ट्वीट किया है।

चंपाई सोरेन ने ट्वीट कर लिखा- झारखंड हाई कोर्ट में एक समाजसेवी ने जनहित याचिका दायर कर एक मंत्री के जाति प्रमाण पत्र पर गंभीर सवाल उठाया है। उक्त याचिका में कहा गया है कि उक्त जाति प्रमाण पत्र के एफिडेविट में धर्म के स्थान पर ईसाई लिखा गया है। जब ईसाई धर्म में कोई जाति व्यवस्था नहीं होती, तो फिर उन्हें अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र कैसे मिला?

इसी साल 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि “ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होती। इसलिए अगर कोई व्यक्ति हिंदू (या सिख/बौद्ध) से ईसाई बन जाता है और सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन/ प्रचार करता है, तो वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।” इस से पहले 27 नवम्बर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी आरक्षण समेत अन्य अधिकार लेने की कोशिश वास्तव में “संविधान के साथ धोखाधड़ी” है। यह भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

लेकिन फिर भी, यहां धर्मांतरित लोग आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा/ लोकसभा सीटों पर ना सिर्फ चुने जा रहे हैं, बल्कि नौकरियों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित अधिकतर सीटों पर भी कब्जा कर रहे हैं। उन्हें कई स्कूल मुफ्त शिक्षा देते हैं, जबकि आदिवासी समाज के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ कर, काफी पीछे रह जाते हैं। दुनिया में कई आदिवासी समुदायों में ईसाई धर्मांतरण के बाद पारंपरिक रीति-रिवाज, त्योहार, भाषा, नृत्य, पूजा-पाठ और सामाजिक संरचनाएं काफी हद तक भुला दी गईं या छोड़ दी गईं। यह प्रक्रिया मिशनरियों के प्रभाव और सामाजिक दबाव से हुई।

लैटिन अमेरिका की अयोरेओ जनजाति, केन्या की संबुरु जनजाति, ब्राजील की वाई वाई जनजाति, फिजी और पैसिफिक आइलैंड्स की जनजातियां धर्मांतरण के बाद अपनी मूल संस्कृति को लगभग भूल चुकी हैं। लेकिन हमारे यहां धर्मांतरण करने वाले लोग स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगते हैं। हम पेड़ के नीचे बैठ कर पूजा करने वाले लोग हैं। बच्चे के जन्म से लेकर, शादी-विवाह एवं मृत्यु तक, आदिवासी समाज की अपनी स्पष्ट जीवनशैली है, हमारी अपनी पूजा पद्धति है, और इसे छोड़ने वाले कुछ भी बनें, लेकिन आदिवासी नहीं हो सकते।

जब आप अपनी रूढ़िजन्य परंपराओं, प्रथाओं, कला-संस्कृति एवं पहचान को छोड़ कर धर्म परिवर्तन करते हैं, तो फिर आपको हमारे समाज को मिले अधिकारों में अतिक्रमण का भी कोई अधिकार नहीं है। जब कोई अपना धर्म बदल लेता है, हमारी परंपराओं से मुंह मोड़ लेता है, एक अलग जीवनशैली अपना लेता है, तो वह खुशी से नए धर्म के साथ रहे, लेकिन भारतीय संविधान द्वारा हमारे समाज को दिए गए अधिकारों को छीनने का प्रयास मत करे।

भारत में कुछ लोग भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर/ लालच देकर/ डरा कर, तो कभी मजबूरी का फायदा उठा कर उनका धर्मांतरण कर रहे हैं। इन्हें रोकना जरूरी है। डीलिस्टिंग की प्रक्रिया द्वारा अथवा अनुच्छेद 342 में जरूरी बदलाव कर के, केन्द्र सरकार को आदिवासियों के अस्तित्व पर आए इस संकट का समाधान करना चाहिए। अगर इस धर्मांतरण को नहीं रोका गया तो भविष्य में हमारे सरना स्थलों, जाहेरस्थानों एवं देशाउली में कौन पूजा करेगा? फिर हमारा अस्तित्व कैसे बचेगा?

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Avantika Raj Choudhary एक अनुभवी और बहुआयामी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। इस दौरान उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वेबसाइट संचालन जैसे मीडिया के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खबरों की गहरी समझ, प्रभावशाली प्रस्तुति और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाने की उनकी क्षमता उन्हें एक सशक्त मीडिया प्रोफेशनल बनाती है। अपने करियर के दौरान Avantika ने Jharkhand Live, The Fourth Pillar, 22 Scope और Khabar Mantra जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है, जहाँ उन्होंने अपनी पेशेवर दक्षता, मेहनत और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एंकर के रूप में उनकी प्रभावशाली संवाद शैली, रिपोर्टर के रूप में जमीनी हकीकत को सामने लाने की क्षमता, और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में सटीक एवं आकर्षक लेखन ने उन्हें मीडिया जगत में एक अलग पहचान दिलाई है। डिजिटल और ग्राउंड मीडिया दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करने का अनुभव रखने वाली Avantika Raj Choudhary पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के साथ खुद को निरंतर अपडेट करती रही हैं। उनकी कार्यशैली में निष्पक्षता, समर्पण और दर्शकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से झलकता है। मीडिया इंडस्ट्री में उनका यह अनुभव और कौशल उन्हें भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है.