नए सचिवालय-विधानसभा परिसर की परियोजना के विरोध में मछुआरों ने प्रदर्शन किया

चेन्नई में 1,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित सचिवालय-विधानसभा परिसर के खिलाफ मछुआरों ने प्रदर्शन किया। समुदाय ने विस्थापन, पारंपरिक आजीविका और समुद्र तक आम लोगों की पहुंच प्रभावित होने की आशंका जताई।

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चेन्नई: चेन्नई के एन्नोर से कोवलम तक तटीय क्षेत्र के मछुआरे मंगलवार को यहां प्रदर्शन कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार शहर के पट्टिनापक्कम में 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाले सचिवालय-विधानसभा परिसर के निर्माण के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले। मछुआरों ने बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंका और अपनी पारंपरिक मछली पकड़ने की आजीविका पर खतरे का हवाला देते हुए कहा कि 24 एकड़ से अधिक भूमि पर इतनी बड़ी संरचना पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्रों को नष्ट कर देगी और समुद्र तक आम लोगों की पहुंच खत्म कर देगी। महिलाओं समेत समुदाय के सैकड़ों सदस्यों ने पट्टिनापक्कम (फोरशोर एस्टेट) स्थित श्रीनिवासपुरम समुद्र तट पर बैठकर प्रदर्शन किया, जबकि दूसरे वर्ग के लोगों ने अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए काले झंडों के साथ जुलूस निकाला। इस दौरान पुलिस की कड़ी मौजूदगी रही, कई क्षेत्रों में अवरोधक लगाए गए और यातायात मार्गों में बदलाव किया गया।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता के केंद्र को ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज से समुद्र तट के पास स्थित पट्टिनापक्कम क्षेत्र में स्थानांतरित करने की योजना की घोषणा की थी और बाद में आठ सितंबर, 2026 को एक सरकारी आदेश जारी कर फोरशोर एस्टेट में नए सचिवालय-विधानसभा परिसर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। मछुआरा समुदाय और राजनीतिक दलों के विरोध के बढ़ने के बीच सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है और यह प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है।

हालांकि, मछुआरों ने आज प्रदर्शन शुरू कर दिया और मांग की कि सरकार उस आदेश को औपचारिक रूप से वापस ले, जिससे उनकी पारंपरिक आजीविका और तटीय पारिस्थितिकी के लिए खतरा पैदा हो रहा है। प्रस्तावित परिसर 25.55 एकड़ भूमि पर बनाए जाने की उम्मीद है, जबकि शुरुआती डिजाइन और विभागों के प्रारंभिक हस्तांतरण में करीब 25.16 एकड़ भूमि के भूखंड का अनुमान लगाया गया है। सरकारी आदेश में पट्टिनापक्कम में कुल 25.55 एकड़ भूमि को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, लोक निर्माण विभाग को लागत के अनुमान के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर जमा करने के लिए तीन महीने की समयसीमा दी गई है। मुल्लीकुप्पम, मुल्लीमा नगर, मायलापुर, श्रीनिवासपुरम, नुचिकुप्पम, एन्नोर और कोवलम तथा अन्य तटीय क्षेत्रों के ग्रामीण भी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। उनकी मांगों में तटीय क्षेत्र को मछुआरों के पारंपरिक आवासीय क्षेत्र के रूप में घोषित करना, समुदाय के लिए वादे के मुताबिक आवास उपलब्ध कराना और भूमि के पट्टे प्रदान करना भी शामिल है। क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। आज का प्रदर्शन एक सुनियोजित सांकेतिक प्रदर्शन और हड़ताल का हिस्सा है। समुदाय के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे अनिश्चितकालीन प्रदर्शन और कई चरणों में आंदोलन शुरू करेंगे। बारह बस्तियों के मछुआरों ने दिनभर मछली पकड़ने की गतिविधियां रोक दीं और काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन किया।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।