छात्रों की गूंज : कुर्ता-पायजामा के बजाय जींस-टी शर्ट और भाषण की जगह ‘जैमिंग’, नेताओं ने बदला अंदाज

Archana Ekka
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इंदौर : लंबे भाषणों, फूलमालाओं और औपचारिक मंचों से आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने ‘जेन-जी’ के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए प्रचार का तरीका बदल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के प्रचार के लिए कांग्रेस नेता अब स्थानीय कैफे-रेस्तरांओं का रुख कर रहे हैं, युवाओं के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं और विद्यार्थियों व स्थानीय बैंड के साथ ‘जैमिंग’ (साथ मिलकर अनौपचारिक रूप से गाना-बजाना) कर रहे हैं।

‘जेन-जी’ (जेनरेशन जेड) से तात्पर्य उस पीढ़ी से है जिसका जन्म मुख्य रूप से वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है। मध्यप्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में हुए छात्र आंदोलन के बाद नयी पीढ़ी के मुद्दों, खासकर शिक्षा और परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज है।

आम तौर पर कुर्ता-पायजामा पहने नजर आने वाले स्थानीय कांग्रेस नेता ‘छात्रों की गूंज’ के पंजीयन अभियान के दौरान युवाओं के बीच जींस और टी-शर्ट में नजर आ रहे हैं। इंदौर जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ज्यादातर युवाओं को राजनेताओं के लंबे भाषण और फूलमालाओं से स्वागत जैसी औपचारिकताएं पसंद नहीं हैं और वे इनमें रुचि नहीं लेते। वानखेड़े, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले जब हम महाविद्यालयों में कार्यक्रम करते थे, तो भाषण होता था और मंच का औपचारिक कार्यक्रम होता था। आज हम महाविद्यालयों में ‘जैमिंग’ सत्रों के दौरान विद्यार्थियों के साथ गाना-बजाना कर रहे हैं। यह एक बड़ा फर्क है।’’ वानखेड़े ने बताया कि ‘छात्रों की गूंज’ के प्रचार के लिए क्रिकेट टूर्नामेंट कराए जा रहे हैं और पुस्तकालयों व छात्रावासों में बैठकें भी की जा रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘नेताओं और राजनीति को लेकर आज के युवाओं की सोच पहले की पीढ़ी से एकदम अलग है। आज का युवा वही बात मानता है, जैसा वह खुद महसूस करता है। उसे इसकी ज्यादा परवाह नहीं होती कि उसका विचार किसी को अच्छा लग रहा है या बुरा।’’ वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि जंतर-मंतर पर पिछले दिनों हुआ छात्र आंदोलन तमाम राजनीतिक दलों के लिए इस सिलसिले में बड़ा सबक है कि नयी पीढ़ी से संवाद किस तरह स्थापित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए कांग्रेस खासकर 30 साल से कम उम्र के लोगों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। जाहिर है कि इसके लिए उसे युवाओं के बीच प्रचार के तौर-तरीके बदलने पड़े हैं।’’ कांग्रेस का दावा है कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के इंदौर में आयोजित होने वाले पांचवें संस्करण के लिए अब तक लगभग दो लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है।

‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किया गया विद्यार्थी-संवाद अभियान है जिसके जरिये वह प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। गांधी की अगुवाई में अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के चार संस्करण आयोजित किए गए हैं।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।