यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की तैयारी, क्या यह ट्रंप को खुश करने की कोशिश है: कांग्रेस

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की जमीन तैयार कर रही है। जयराम रमेश ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा।

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ‘‘ईमानदारी और पारदर्शिता की पूरी तरह कमी’’ दिखाते हुए यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की जमीन तैयार कर रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि क्या यह सब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के वास्ते डिजिटल भुगतान का रास्ता खोलने के मकसद से किया जा रहा है? उनकी यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है।

सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि के यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता है। इसको लेकर रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि सरकार संसद से ‘‘जबरन पारित कराए गए नए कानूनों’’ का इस्तेमाल करके यूपीआई पर शुल्क लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। उन्होंने कहा कि संशोधित भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत हाल में एक अधिसूचना जारी की गई है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को केवल 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने से रोकती है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘साफ तौर पर हम सभी से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है।’’ रमेश ने कहा कि भविष्य में इसी तरह की किसी अन्य अधिसूचना के जरिये यह सीमा बदली जा सकती है और ‘‘अब कानून में इसकी कोई गारंटी नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक हमें पता है, सरकार रोजमर्रा के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क लगा सकती है।’’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी ने छह अगस्त 2026 को इस मुद्दे को लेकर चेतावनी दी थी और ‘‘माननीय वित्त मंत्री ने खुद जवाब देना उचित समझा था।’’ रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ‘‘एक बार फिर ईमानदारी और पारदर्शिता की पूरी तरह कमी दिखाई है और उपयोगकर्ताओं का भरोसा तोड़ा है।’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की यह कवायद अमेरिकी कंपनियों के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता खोलने के उद्देश्य से की जा रही है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।