
नयी दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताएं आजादी के बाद से श्रमिकों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका हैं और मोदी सरकार ने हालिया विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद “कायरतापूर्ण अंदाज” में इनके नियमों को अधिसूचित किया।
उन्होंने कांग्रेस के इस वादे को दोहराया कि केंद्र में पार्टी की सरकार बनने पर इन श्रम संहिताओं की समीक्षा की जाएगी। खरगे ने एक बयान में कहा, ‘अपने चिर परिचित कायरतापूर्ण अंदाज में मोदी सरकार ने 8 और 9 मई 2026 को चार श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया और इससे पहले विधानसभा चुनावों के समाप्त होने का इंतजार किया। भारत के करोड़ों श्रमिकों के लिए ये संहिताएं काम पर रखने और नौकरी से निकालने की नीतियों, अनुबंध पर रोजगार और यूनियन की गतिविधि के लिए सीमित संभावना प्रदान करती हैं।’

