कांग्रेस ने पूर्व न्यायाधीश के संस्मरण का हवाला देकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर ‘गंभीर सवाल’ उठाए

पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देकर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने न्यायिक नियुक्तियों और सरकारी दबाव का मुद्दा उठाया।

Archana Ekka
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नयी दिल्ली : कांग्रेस ने रविवार को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर ‘‘गंभीर सवाल’’ उठाए और कहा कि संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रहना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट साझा की जिसमें कौल के संस्मरण ‘विदाउट फियर ऑफ फेवर’ की प्रकाशन-पूर्व पांडुलिपि का हवाला देते हुए कहा गया कि नियुक्तियों के मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ‘‘सरकार के प्रति कुछ ज्यादा ही विनम्र’’ थे।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।