नयी दिल्ली : कांग्रेस ने रविवार को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर ‘‘गंभीर सवाल’’ उठाए और कहा कि संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रहना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट साझा की जिसमें कौल के संस्मरण ‘विदाउट फियर ऑफ फेवर’ की प्रकाशन-पूर्व पांडुलिपि का हवाला देते हुए कहा गया कि नियुक्तियों के मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ‘‘सरकार के प्रति कुछ ज्यादा ही विनम्र’’ थे।


