
नई दिल्ली: संसद में पेश महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस ने अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी का कहना है कि वह हमेशा से महिला सशक्तिकरण की समर्थक रही है और आज भी महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के पक्ष में मजबूती से खड़ी है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने जिस तरीके से इस अहम विषय को पेश किया है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस का मानना है कि महिला आरक्षण को सिर्फ राजनीतिक घोषणा या चुनावी रणनीति नहीं बनाया जाना चाहिए। इसे पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार सच में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो इसे बिना किसी शर्त और देरी के लागू करना चाहिए। लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को अनिश्चित बना दिया है।
परिसीमन को लेकर कांग्रेस ने संसद के अंदर और बाहर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि जिस तरह से परिसीमन की प्रक्रिया सामने लाई जा रही है, उससे देश के संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार आखिर क्यों इतने महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना पर्याप्त चर्चा के जल्दबाजी में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में संवाद, सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है, लेकिन सरकार इन मूल्यों को नजरअंदाज कर रही है।
कांग्रेस ने साफ किया कि वह किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगी जो संविधान की भावना, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता हो। पार्टी महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके नाम पर राजनीतिक संरचना से समझौता स्वीकार नहीं करेगी। अंत में कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि महिला आरक्षण को तुरंत और स्वतंत्र रूप से लागू किया जाए। साथ ही परिसीमन जैसे मुद्दे पर सभी दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कर सहमति बनाई जाए, ताकि लोकतंत्र की मूल भावना कायम रह सके।

