दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण, आदिवासी आंदोलन के प्रतीक को राष्ट्रीय सम्मान

Archana Ekka
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Dishom Guru Shibu Soren awarded Padma Bhushan: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन (Shibu Soren) को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की गई है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी पद्म पुरस्कारों की सूची में उनका नाम शामिल किया गया।

यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और जनसेवा के लिए दिया जा रहा है। झामुमो ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे आदिवासी समाज के संघर्षों का सम्मान बताया है।

सम्मान का स्वागत, लेकिन मांग बरकरार

JMM नेताओं ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान स्वागत योग्य है, लेकिन गुरुजी के योगदान को देखते हुए भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी।

उनका मानना है कि गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने आदिवासी समाज को देश की मुख्यधारा से जोड़ा।

आज भी आदिवासी समाज को जिस स्तर का सम्मान मिलना चाहिए, वह पूरी तरह नहीं मिल पाया है और गुरुजी इसके सबसे बड़े प्रतीक रहे।

जन्म और शुरुआती संघर्ष

Shibu Soren का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य रहा।

उन्होंने महाजनी शोषण, भूमि लूट और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया और आदिवासी समाज को संगठित किया।

आंदोलन और राजनीतिक भूमिका

दिशोम गुरु चार दशकों तक झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे। अलग झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई।

वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, आठ बार सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। आदिवासी अधिकारों की राजनीति में उनका नाम दशकों तक केंद्र में रहा।

अंतिम विदाई, लेकिन विचार अमर

4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संघर्ष और विचार आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

Padma Bhushan Award उनके जीवन के उद्देश्य और समाज के लिए किए गए कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देता है।

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