
रांची : झारखंड हाईकोर्ट में 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। पहले यह मामला हाईकोर्ट की एकल पीठ में खारिज हो चुका था, लेकिन अब याचिकाकर्ताओं ने इसके खिलाफ डबल बेंच में अपील दायर की है। इस अपील पर बुधवार को सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अहम निर्देश दिए।
डबल बेंच में हुई सुनवाई
डबल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो पहले ही सफल घोषित हो चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को निर्देश दिया कि 342 ऐसे अभ्यर्थियों, जिन्हें नियुक्ति पत्र मिल चुका है, उन्हें दो सप्ताह के भीतर इस केस में प्रतिवादी बनाया जाए।
किसने रखा किसका पक्ष
सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से महाधिवक्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने आयोग का पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की तरफ से उनके वकीलों ने अदालत के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अदालत ने आगे की प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश दिए।
पहले ही खारिज हो चुकी है याचिका
गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की एकल पीठ इस याचिका को खारिज कर चुकी है। एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां समय पर नहीं उठाई गई थीं। साथ ही अदालत को मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसी कोई गंभीर कमी नहीं मिली, जिसके आधार पर परीक्षा परिणाम को रद्द किया जा सके।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या थी
याचिका में कहा गया था कि जेपीएससी ने मेंस परीक्षा की कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन कराया, जो परीक्षा नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि क्षेत्रीय भाषा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कम अनुभव वाले परीक्षकों से कराया गया, जबकि नियमों के अनुसार परीक्षकों का कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए।
जेपीएससी का जवाब
जेपीएससी की ओर से यह दलील दी गई कि याचिकाकर्ता परीक्षा में असफल रहे हैं, इसलिए अब वे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। आयोग का कहना था कि यदि परीक्षा पद्धति से कोई आपत्ति थी, तो उसे परिणाम आने से पहले उठाया जाना चाहिए था। सभी उम्मीदवारों के लिए नियम समान थे और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ।
आगे क्या होगा
अब डबल बेंच के निर्देश के बाद मामला और बड़ा हो गया है। 342 चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाए जाने के बाद ही केस की आगे की सुनवाई होगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में अदालत इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।

