
पिछले कुछ वर्षों से बॉलीवुड बनाम क्षेत्रीय सिनेमा की बहस लगातार चर्चा में रही है. फिल्मों की कमाई, कहानी कहने के अंदाज और कॉमेडी जैसे विषयों पर अक्सर हिंदी फिल्मों की तुलना दक्षिण भारतीय और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों से की जाती है. इस मुद्दे पर अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि किसी एक फिल्म इंडस्ट्री को दूसरी से बेहतर बताना पूरी तरह गलत है.
स्क्रिप्ट और प्रेजेंटेशन ही तय करते हैं सफलता
एक इंटरव्यू में जब दिव्या से पूछा गया कि क्या क्षेत्रीय सिनेमा आज कॉमेडी के मामले में बॉलीवुड से आगे निकल गया है, तो उन्होंने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री का सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, चाहे हिंदी सिनेमा हो, क्षेत्रीय फिल्में हों या अंतरराष्ट्रीय सिनेमा, यदि कहानी मजबूत है और उसका प्रेजेंटेशन प्रभावशाली है, तो फिल्म निश्चित रूप से दर्शकों का दिल जीतती है.
भाषा नहीं, कंटेंट होता है सबसे बड़ा सितारा
दिव्या दत्ता ने जोर देकर कहा कि किसी फिल्म की सफलता उसकी भाषा पर नहीं, बल्कि उसकी स्क्रिप्ट और प्रस्तुति पर निर्भर करती है. उनका मानना है कि अच्छी कहानी हर भाषा की सीमाओं को पार कर दर्शकों से जुड़ जाती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि हाल ही में रिलीज हुई ‘कैरी ऑन जट्टा 4’ इस सोच का बेहतरीन उदाहरण साबित होगी और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेगी.

