व्हीलचेयर पर बैठकर केरल की डॉ. अथिरा ने जीती सिविल सेवा परीक्षा की जंग, हासिल किया 483वां रैंक

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कोझिकोड (केरल): करीब दस साल पहले एक सड़क दुर्घटना के बाद से व्हीलचेयर पर निर्भर रहने वाली केरल के कोझिकेाड की 30 वर्षीय डॉ. अथिरा सुगुथन ने सिविल सेवा परीक्षा में 483वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि साहस और दृढ़ संकल्प किसी भी शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़कर कामयाबी के रास्ते पर ले जा सकता है। अथिरा ने शनिवार को बताया कि जब वह बेंगलुरु में बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) की पढ़ाई कर रही थीं, तब एक सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई थीं। इसके कारण उनकी दो साल तक याददाश्त भी चली गई थी। अथिरा ने शनिवार को बताया कि जब वह बेंगलुरु में बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) की पढ़ाई कर रही थीं, तब एक सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई थीं। इसके कारण उनकी दो साल तक याददाश्त भी चली गई थी। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में उनके माता-पिता और उनकी बहन अनघा ने उनका बहुत साथ दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘दुर्घटना के समय अनघा मनोविज्ञान की दूसरे वर्ष की छात्रा थी। उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और मेरी देखभाल के लिए बीएससी नर्सिंग में दाखिला ले लिया। अब वह एक नर्स के रूप में काम कर रही है।’’ अथिरा ने कहा कि वह हमेशा से विदेश खासकर फ्रांस में एमडीएस करना चाहती थीं, लेकिन दुर्घटना के कारण उनके सपने टूट गए। उन्होंने कहा, ‘‘व्हीलचेयर पर निर्भर रहने के दौरान और एक एनजीओ के दिव्यांगता प्रकोष्ठ में काम करते हुए मुझे समझ आया कि मैं क्या कर सकती हूं और मुझे क्या करना चाहिए। वहीं से सामाजिक सेवा मेरे जीवन का सपना बन गई।’’ अथिरा ने कहा कि अगर यह दुर्घटना नहीं हुई होती, तो उन्होंने शायद कभी सिविल सेवा में जाने के बारे में नहीं सोचा होता। उन्होंने कहा कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बनने तक प्रयास जारी रखेंगी।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए उन्होंने मलयालम साहित्य विषय चुना, क्योंकि उन्हें यह विषय पसंद था और इसके लिए उनके पास आवश्यक अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध थी। अथिरा ने बताया कि वह मलयालम में कहानियां लिखती हैं। उनकी हाल की कहानी उनकी मां पर आधारित है, जो दुर्घटना के बाद जीवन को पटरी पर लाने की उनकी यात्रा में ‘‘सबसे बड़ा सहारा’’ रही हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को परीक्षा के परिणाम घोषित किए, जिसमें 958 उम्मीदवार सफल हुए हैं और उन्हें विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति मिलेगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।