
महासमुंद (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के निवासी संजय डहरिया (38) ने कैंसर से लड़ते हुए संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी की और अंतत: अपने तीसरे प्रयास में कामायाबी हासिल कर ली। छोटे से गांव से आने वाले संजय की यह कामयाबी राज्य के युवाओं के लिए हिम्मत, लगन और पक्के इरादे की एक मजबूत मिसाल है।
महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले संजय ने यूपीएससी परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। डहरिया अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। उन्हें देखने में भी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ता है। संजय के पिता लखनलाल डहरिया किसान हैं और माता रेशम डहरिया गृहणी हैं। तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे, संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की।
संजय ने बताया कि जब वह गांव के स्कूल में पांचवी कक्षा में पढ़ते थे तब उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में हुआ। उन्होंने वहां 12वीं तक की पढ़ाई की। बाद में महासमुंद के वल्लभाचार्य शासकीय महाविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए करते हुए उन्होंने यूपीएसएसी और अन्य परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि वह पहले भारतीय स्टेट बैंक की परीक्षा में सफल हुए और 2009 से 2011 तक पश्चिम बंगाल की एक शाखा में काम किया।
बड़ा लक्ष्य पाने के इरादे से उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस दौरान वर्ष 2012 में संजय को पता चला कि उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है, तब उन्हें सपनों के टूटने का अहसास हुआ। इसके बाद भी उन्होंने अपने सपनों को जीना नहीं छोड़ा और यूपीएससी की जंग जीतकर एक मिसाल कायम की है।

