DSPMU में छात्रों को साइबर धोखाधड़ी से बचाव और वित्तीय समझ पर मिली अहम जानकारी

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DSPMU Students Received Valuable Information: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के रसायन विज्ञान विभाग में छात्रों के लिए एक उपयोगी और जागरूकता बढ़ाने वाला सेमिनार आयोजित किया गया।

यह सेमिनार साइबर धोखाधड़ी जागरूकता (Cyber Fraud Awareness) और वित्तीय प्रबंधन विषय पर केंद्रित था।

कार्यक्रम का आयोजन आज SBI स्मार्ट-प्रमाणित वित्तीय शिक्षा संगठन एम्पीरिकल एफ एंड एम एकेडेमी प्राइवेट लिमिटेड (Empirical F&M Academy Private Limited) के सहयोग से सफलतापूर्वक किया गया।

छात्रों को वित्तीय साक्षर बनाने पर रहा जोर

इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को वित्तीय रूप से जागरूक बनाना और तेजी से बढ़ रही साइबर व वित्तीय धोखाधड़ी के बारे में सतर्क करना था। खासकर युवाओं को निशाना बनाने वाली फर्जी गतिविधियों से बचने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य वक्ताओं ने साझा किया अनुभव

कार्यक्रम में एकेडेमी से जुड़े डॉ. रमण वल्लभ और श्री नेहल तापरिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। दोनों वक्ताओं ने सरल भाषा में छात्रों को वित्तीय जोखिमों और उनसे बचाव के उपाय समझाए।

विभागाध्यक्ष के स्वागत संबोधन से हुई शुरुआत

सेमिनार की शुरुआत रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में सुरक्षित वित्तीय प्रणाली और सोच-समझकर निर्णय लेना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को छात्रों के लिए बेहद उपयोगी बताया।

आम धोखाधड़ियों की पहचान पर दी गई जानकारी

सेमिनार के दौरान छात्रों को सुरक्षित बैंकिंग लेन-देन के तरीके बताए गए। साथ ही फर्जी निवेश योजनाएं, झूठे स्टॉक टिप्स, अवैध निवेश ऑफर और सोशल मीडिया पर फैल रहे “जल्दी अमीर बनने” के जाल जैसी धोखाधड़ियों को पहचानने के बारे में जानकारी दी गई।

साइबर फ्रॉड से बचने के बताए गए उपाय

मुख्य वक्ता डॉ. रमण वल्लभ ने ओटीपी घोटाले, फिशिंग, यूपीआई से जुड़े फ्रॉड और ऐप आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने बताया कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है।

सेबी की भूमिका पर भी हुई चर्चा

सेमिनार में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की भूमिका, निवेशकों की सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। छात्रों को अनियमित सलाहकारों और भ्रामक कर-बचत योजनाओं से दूर रहने की सलाह दी गई।

प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों की शंकाएं दूर

अंतिम सत्र में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें छात्रों ने खुलकर सवाल पूछे। वास्तविक जीवन के उदाहरणों से विषय को और आसान व समझने योग्य बनाया गया।

बड़ी संख्या में छात्र रहे शामिल

कार्यक्रम में संकाय सदस्य डॉ. पूनम भारद्वाज, डॉ. नलिनी कांत रॉय, डॉ. अशोक कुमार आचार्य, डॉ. रियाज हसन, ऋषभ कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

विश्वविद्यालय ने दोहराई प्रतिबद्धता

कार्यक्रम के सफल समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के समग्र विकास के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सत्र का समापन छात्रों की सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया के साथ हुआ।

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