मुद्रा संग्राहक और अध्येता गिरीश शर्मा “आदित्य” को रशियन रिसर्च विश्वविद्यालय ने दी डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर की मानद उपाधि

प्राचीन भारतीय मुद्राओं के संग्राहक गिरीश शर्मा आदित्य को रशियन रिसर्च विश्वविद्यालय ने डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया, उनकी 56 वर्षों की मुद्रा साधना को सराहा।

Razi Ahmad
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नई दिल्ली : भारतीय प्राचीन मुद्राओं के सबसे बड़े संग्राहक और अध्येता गिरीश शर्मा “आदित्य” को रशियन रिसर्च विश्वविद्यालय, मास्को ने डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर (न्यूमिस्मैटिक एंड हेरिटेज संरक्षक) की मानद उपाधि प्रदान की है। नई दिल्ली के मेपल गोल्ड परिसर में संपन्न दीक्षांत समारोह में देश-विदेश के अति महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों की गरिमामय उपस्थिति में आदित्य शर्मा को इस सम्मानपूर्ण उपाधि से नवाजा गया।

विश्वविद्यालय के चेयरमैन प्रोफ़ेसर विक्टर सदोवनिचिय एवं सचिवालय प्रमुख प्रोफेसर एमवी कुज़्नेसोव ने जारी प्रशंसा पत्र में गिरीश शर्मा की 56 वर्षों की मुद्रा साधना को एक स्मरणीय कार्य निरूपित किया है। इसमें उन्होंने ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन और ऑक्सफ़ोर्ड के संग्रहालयों में प्रस्तुत व्याख्यानों का उल्लेख किया है।

इस समारोह में विश्वविद्यालय के भारत प्रमुख डॉ. पुष्पेंद्र शर्मा एवं प्रसिद्ध विद्वानों ने श्री शर्मा को गाउन प्रदान किया और विश्वविद्यालय का मेडल पहनाया। अपने उदबोधन में श्री शर्मा ने अपने संपूर्ण संग्रह को देश की आगामी पीढ़ियों के लिए एक म्यूजियम की स्थापना के माध्यम से दान करने का संकल्प दोहराया। इस सम्मान से देश, प्रदेश और इंदौर महानगर का गौरव सोवियत रूस तक पहुंचा है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।