आदिवासी एक्टिविस्ट ग्लैडसन डुंगडुंग को स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार

झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी एक्टिविस्ट और लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग को हिंदी पत्रकारिता में उनके विशिष्ट योगदान और संघर्षशील लेखन के लिए प्रतिष्ठित ‘स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

News Aroma
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

बेंगलुरु : इंडियन कैथोलिक प्रेस एसोसिएशन (ICPA) ने झारखंड के आदिवासी एक्टिविस्ट, शोधकर्ता एवं लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग को हिन्दी पत्रकारिता में विशेष योगदान के लिए ‘‘स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार’’ से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार उन्हें आई.सी.पी.ए. के वार्षिक सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार माया शर्मा ने दिया। यह पुरस्कार आदिवासियों के मुद्दे, अधिकार एवं संघर्ष को हिन्दी अखबारों, पत्रिकाओं एवं पुस्तकों के द्वारा निरंतर सामने लाने हेतु दिया गया है। पुरस्कार ग्रहण करते हुए ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि यह पुरस्कार न सिर्फ हिंदी पत्रकारिता में उनके योगदान को रेखांकित करता है बल्कि यह उनके द्वारा आदिवासियों के लिए विगत दो दशक से लड़े जा रहे न्याय की लड़ाई को भी सम्मानित करता है। वे आदिवासी समुदायों के लिए न्याय की लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।
ज्ञात हो कि ग्लैडसन डुंगडुंग ने हिन्दी और अंग्रेजी में अबतक 500 से ज्यादा ग्रांउड रिपोर्ट, आलेख एवं शोधपत्र लिखा है, जो अखबारों, पत्रिकाओं एवं सम्पादित पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अंग्रेजी एवं हिन्दी में 35 पुस्तके लिखी है, जिनमें आदिवासीज एंड देयर फोरेस्ट, एंडलेस क्राई इन द रेड काॅरिडोर, मिशन सारंडा, हूज कंट््री इज इट एनी? क्राॅसफायर, भारत देश के प्रथम निवासी और मालिक कौन, उलगुलान का सौदा, असूरों की पीड़ा, विकास के कब्रगाह प्रमुख हैं।
‘‘स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार’’ ऐसी पत्रकारिता को सम्मान देता है जो उन समुदायों और मुद्दों को सामने लाती है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की सार्वजनिक चर्चा में जगह नहीं मिलती है। अपनी लेखनी, शोध और जमीनी काम के जरिए, ग्लैडसन डुंगडुंग ने न्याय, सम्मान, अधिकार और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लगातार सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया है। उनका काम जमीनी स्तर पर मानवाधिकारों की वकालत से भी गहराई से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस अत्याचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े सैकड़ों मामलों का अनुशंधान किया, कानूनी लड़ाई लड़ा एवं पीड़ितों को मदद पहुंचाया है।
हिन्दी पत्रकारिता के लिए दिया जाने वाला ‘स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार’ उस बेहतरीन पत्रकारिता को सम्मानित करता है, जिसमें पेशेवर प्रतिबद्धता, सामाजिक जिम्मेदारी और बेजुबान लोगों की फिक्र झलकती है। यह पुरस्कार न केवल हिन्दी मीडिया में ग्लैडसन डुंगडुंग के योगदान को मान्यता देता है, बल्कि उस पत्रकारिता को भी सम्मान देता है जो आदिवासी समुदायों के मुद्दों, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर आधारित है।

Share This Article