
रांची : रांची रेल मंडल के लिए एक अहम कदम उठाते हुए रेलवे ने हटिया यार्ड में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के मेंटेनेंस के लिए दो नई पिटलाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर काम शुरू हो चुका है और इसे क्षेत्रीय रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद रांची से संचालित वंदे भारत ट्रेनों का मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के संचालन में समयबद्धता आएगी और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी। साथ ही, भविष्य में रांची से वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को पूरा होने में लगभग डेढ़ से दो वर्ष का समय लगेगा। वर्तमान में हटिया यार्ड में आठ पिटलाइन मौजूद हैं, जिनके माध्यम से करीब 24 ट्रेनों का मेंटेनेंस किया जाता है। नई पिटलाइन के जुड़ने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी और मेंटेनेंस क्षमता लगभग 30 ट्रेनों तक पहुंच जाएगी।
नई पिटलाइन को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इनमें ओवरहेड क्रेन, आधुनिक लेथ मशीन और अन्य उन्नत उपकरण शामिल होंगे, जिससे मेंटेनेंस कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा। इसके अलावा, यार्ड में एक शेड भी बनाया जाएगा ताकि कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके।
फिलहाल रांची रेल मंडल से तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों रांची-वाराणसी, रांची-हावड़ा और रांची-पटना का संचालन हो रहा है। अभी इन ट्रेनों के रखरखाव के लिए अन्य रेल मंडलों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन नई सुविधा के शुरू होने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी।
क्या है पिटलाइन और क्यों है जरूरी
पिटलाइन रेलवे यार्ड में बनाई जाने वाली विशेष संरचना होती है, जहां ट्रेन को खड़ा कर उसके नीचे तक पहुंचकर तकनीकी जांच, मरम्मत और सफाई का काम किया जाता है। वंदे भारत जैसी आधुनिक और सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के लिए यह सुविधा बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसके जरिए ब्रेक, पहियों, सस्पेंशन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की नियमित जांच संभव होती है।
यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
नई पिटलाइन बनने से ट्रेनों का रखरखाव बेहतर तरीके से और समय पर हो सकेगा। इससे यात्रा अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनेगी, ट्रेनों की देरी और रद्द होने की समस्या कम होगी, और रांची से अधिक ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी साफ होगा।

