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कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ा: जानें इसके 5 प्रमुख लक्षण और बचाव के उपाय

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Increased-risk-of-colorectal-cancer:दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे कैंसर मामलों में कोलोरेक्टल कैंसर तीसरे स्थान पर है। यह कैंसर मुख्य रूप से बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय में होता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है, खासतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।

2040 तक बढ़ सकता है खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2040 तक कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में 63% की वृद्धि हो सकती है, जिससे हर साल लगभग 3.2 मिलियन नए मामले सामने आ सकते हैं। इसके अलावा, कैंसर से होने वाली मौतों में भी 73% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे हर साल 1.6 मिलियन लोगों की मौत हो सकती है।

इसलिए, अगर कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इलाज सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

कोलोरेक्टल कैंसर के 5 प्रमुख लक्षण

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अगर आपके शरीर में ये लक्षण दिखें तो उन्हें नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

1. मल त्याग में बदलाव:

अगर आपकी पॉटी करने की आदतों में बदलाव आ रहा है, जैसे बार-बार दस्त या कब्ज होना, तो यह संकेत हो सकता है।

अगर मल बहुत पतला हो जाए, या ऐसा लगे कि पेट ठीक से साफ नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर को दिखाएं।

 

2. मल में खून आना:

अगर पॉटी के दौरान खून आए या उसमें रक्त के थक्के दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लें।

मल का रंग गहरा भूरा या काला होना भी खतरे का संकेत हो सकता है।

3. पेट दर्द या असहज महसूस करना:

अगर आपको पेट में बार-बार ऐंठन हो रही है, दर्द महसूस हो रहा है, या गैस और पेट फूलने की समस्या हो रही है, तो यह लक्षण कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत हो सकता है।

 

4. बिना कारण के अचानक वजन घटना:

यदि आपने अपनी डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव नहीं किया है और फिर भी अचानक वजन घट रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।

इसके साथ लगातार कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है।

 

5. सांस लेने में परेशानी:

कोलोरेक्टल कैंसर में लंबे समय तक खून की कमी (एनीमिया) हो सकती है, जिससे सांस फूलने जैसी समस्या उत्पन्न होती है।

 

कैसे करें बचाव?

फाइबर युक्त आहार, हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें।

प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट और अधिक वसा वाले भोजन से बचें।

नियमित रूप से व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रित रखें।

45-50 साल की उम्र के बाद कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग कराना फायदेमंद हो सकता है।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा हो, तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना आपकी जान बचा सकता है।

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