चित्रों और लोककथाओं के जरिए मृत्यु से जुड़ी मान्यताओं का वर्णन

जादोपटिया अनुष्ठान झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है। इस दौरान पारंपरिक चित्रों और लोककथाओं के माध्यम से जीवन, मृत्यु और उससे जुड़ी मान्यताओं का वर्णन किया जाता है। नेमरा में आयोजित इस अनुष्ठान को विशेश्वर चित्रकार ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया।

इस मौके पर आदिवासी परंपरा के अनुसार तीन नहान यानी स्नान की रस्म भी पूरी की गई। अनुष्ठान के दौरान धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष रूप से पालन किया गया।
परिवार के सदस्य रहे मौजूद


इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनकी पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने पारंपरिक विधियों में भाग लेकर दिवंगत रूपी सोरेन की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान संपन्न कराया।
आदिवासी संस्कृति से जुड़ी है जादोपटिया परंपरा
जादोपटिया झारखंड की प्राचीन लोककला और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान है। इस परंपरा में चित्रों और मौखिक कथाओं के माध्यम से जीवन-मृत्यु, सामाजिक मान्यताओं और लोकविश्वासों को प्रस्तुत किया जाता है। यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को भी दर्शाता है।


