अस्पतालों को लगानी होगी स्वास्थ्य सेवाओं की रेट लिस्ट, मनमाने शुल्क वसूलने पर लगेगी रोक

अब अस्पतालों को इलाज और विभिन्न सेवाओं के शुल्क स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में प्रदर्शित करने होंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के इस निर्देश से मरीजों को खर्च की जानकारी और मनमानी वसूली से राहत मिलने की उम्मीद है।

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नई दिल्ली: देश के मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब देश भर के सभी चिकित्सा संस्थानों (अस्पतालों) के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने संस्थान में दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं और सुविधाओं के शुल्क (रेट) को स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में स्पष्ट रूप से बोर्ड पर प्रदर्शित करें। यह जानकारी ऐसी प्रमुख जगह पर लगानी होगी, जो आने-जाने वाले सभी लोगों को आसानी से दिखाई दे।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार लाना है, ताकि चिकित्सा संस्थान मरीजों से अनाप-शनाप या मनमाने दाम न वसूल सकें। इस व्यवस्था के लागू होने से मरीज को पहले ही पूरी जानकारी मिल जाएगी कि उसे किस टेस्ट या सेवा के लिए कितना शुल्क देना होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में पारदर्शिता होने से मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के संभावित खर्च को समझने, चिकित्सा से जुड़े सही फैसले लेने तथा अपने मेडिकल खर्च की बेहतर योजना बनाने में काफी मदद मिलेगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।