
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक ऐसी दुनिया तैयार करना है, जहां सभी देश चरम मौसम, जलवायु परिवर्तन और जल संबंधी आपदाओं के प्रति पहले से अधिक तैयार रहें।
क्या है विश्व मौसम विज्ञान दिवस का इतिहास
विश्व मौसम विज्ञान संगठन का मुख्यालय जिनेवा में स्थित है। WMO के अनुसार, यह दिन राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।
मौसम विभाग लोगों को कैसे करता है जागरूक
विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर मौसम केंद्र पूरी तरह आम लोगों के लिए खुला रहता है। इस दौरान विभिन्न आधुनिक यंत्रों और तकनीकों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। लोगों को बताया जाता है कि मौसम की जानकारी कैसे जुटाई जाती है और उसके परिणामों का क्या अर्थ होता है।
सैटेलाइट तस्वीरों, रडार और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाती है। इसके अलावा लोगों को मौसम से जुड़ी एडवाइजरी और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया जाता है।
किसानों को भी मिलती है मौसम की सटीक जानकारी
मौसम विभाग किसानों तक भी नियमित रूप से मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, किसानों को समाचार पत्रों और मीडिया के जरिए सामान्य मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जाता है।
इसके अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत कृषि विश्वविद्यालयों, रिसर्च सेंटरों और मौसम विभाग के संयुक्त प्रयास से विशेष बुलेटिन जारी किए जाते हैं। इनमें अगले पांच दिनों के मौसम का अनुमान और खेती से जुड़ी सलाह दी जाती है।
इन रिपोर्टों के आधार पर किसानों को बताया जाता है कि किस मौसम में कौन-सी फसल की बुवाई करनी चाहिए और फसलों की सुरक्षा के लिए किन सावधानियों का पालन करना जरूरी है।

