नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के विरोध में 23 जून को देशभर में किसान संगठन प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने दावा किया है कि यह समझौता देश के किसानों, पशुपालकों, डेयरी क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। विशेष बातचीत में चढूनी ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि यदि भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक खोल दिया गया तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं चल रही हैं और अब ये अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। 23 और 24 जून को नई दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की चर्चाएं हैं। किसानों को आशंका है कि इस समझौते के तहत कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों में विदेशी उत्पादों के लिए बाजार खोलने का दबाव बढ़ सकता है। चढूनी ने कहा कि भारतीय किसान पहले ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में आते हैं तो स्थानीय किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर 23 जून को विभिन्न किसान जत्थेबंदियां देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगी और केंद्र सरकार से किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग करेंगी।
किसान संगठनों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में देश की खाद्य संप्रभुता, कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसानों ने सरकार से ट्रेड डील के सभी प्रावधानों को सार्वजनिक करने और कृषि क्षेत्र से जुड़े पक्षों से व्यापक चर्चा करने की मांग भी की है। किसान नेताओं के अनुसार, यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।


