
मुंबई: विषैली पशु-चिकित्सा दवाओं के कारण लगभग दो दशक पहले भारत में गिद्धों की आबादी बेहद कम हो गयी थी और वे आसमान से लगभग लुप्त हो गए थे लेकिन अब 700 से अधिक गिद्धों के कैद में प्रजनन और चरणबद्ध पुनर्वास कार्यक्रमों की बदौलत उनकी वापसी हो रही है तथा देश के संरक्षित बाघ अभयारण्य उनके लिए नए सुरक्षित ठिकाने बन रहे हैं।
गिद्धों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें पेंच, ताडोबा-अंधारी और मेलघाट जैसे बड़े टाइगर रिजर्व में छोड़ा जा रहा है, जहाँ मवेशियों की जहरीली दवाओं का खतरा नहीं होता और प्राकृतिक भोजन आसानी से उपलब्ध है। इसके अलावा, जीपीएस (GPS) और जीएसएम (GSM) ट्रांसमीटरों के जरिए उनकी उड़ान की निगरानी भी की जा रही है। मध्य प्रदेश (विशेषकर कान्हा टाइगर रिजर्व) और राजस्थान जैसे राज्यों में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के दौरान इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में भी एशिया का पहला ‘जटायु’ गिद्ध संरक्षण केंद्र स्थापित किया गया है।

