


नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को कथित आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और छह अन्य लोगों के खिलाफ धन शोधन के आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज इसी कथित घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और 11 अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किये थे। बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि धन शोधन के अपराध के मामले में सात लोगों के खिलाफ ”पुख्ता संदेह” है तथा जांच का स्वरूप, समय और तरीका — ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है।





न्यायाधीश ने इस मामले में सात आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया। सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि संप्रग-1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने 2004 में आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का काम एक कंपनी को सौंप दिया था। इसके बदले में उन्हें पटना में एक बेशकीमती जमीन रिश्वत के तौर पर मिली थी, जो प्रेम चंद गुप्ता (पूर्व केंद्रीय मंत्री) की पत्नी सरला गुप्ता की एक बेनामी कंपनी के जरिए प्राप्त की गई थी। सीबीआई की इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया। अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के जरिए की गई ”अपराध से अर्जित आय” की जांच की थी।
सीबीआई की प्राथमिकी में जिन अन्य लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें विजय कोचर, विनय कोचर (दोनों सुजाता होटल के निदेशक), डिलाइट मार्केटिंग कंपनी (जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है) और आईआरसीटीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पी.के. गोयल शामिल हैं। रांची और ओडिशा के पुरी में होटलों के रखरखाव का अनुबंध देने में सुजाता होटल को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने और बदले में बेशकीमती जमीन हासिल करने के मामले में पांच जुलाई 2018 को सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
