

अभिनेत्री ईशा सिंह इन दिनों अपने नए धारावाहिक ‘जूही मुई’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वह ऑटिज्म से प्रभावित लड़की जूही की भूमिका निभा रही हैं। इससे पहले ‘मिडिल क्लास लव’ और ‘ऑब्सेस’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं ईशा ने इस किरदार को अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी वाला रोल बताया है।





ऑटिज्म को लेकर जागरूकता की कमी पर जताई चिंता
ईशा सिंह का कहना है कि समाज में आज भी ऑटिज्म को लेकर कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। पढ़े-लिखे लोगों के बीच भी इस विषय को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है। कई लोग ऑटिज्म को बीमारी या संक्रामक स्थिति समझ लेते हैं, जबकि यह मस्तिष्क के विकास से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।
सहानुभूति नहीं, बराबरी और स्वीकार्यता जरूरी
ईशा के मुताबिक, ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे बेहद संवेदनशील, प्रतिभाशाली और प्यार करने वाले होते हैं। उन्हें बदलने की कोशिश करने के बजाय समाज को उन्हें उनकी वास्तविक पहचान के साथ स्वीकार करना चाहिए। ऐसे बच्चों को दया या सहानुभूति नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान और बराबरी का अधिकार चाहिए।
किरदार को समझने के लिए किया गहरा रिसर्च
ईशा सिंह ने जूही के किरदार को पर्दे पर वास्तविक दिखाने के लिए काफी मेहनत की है। उन्होंने ऑटिज्म से जुड़े कई इंटरव्यू देखे, विशेषज्ञों से बातचीत की और इस विषय पर किताबें भी पढ़ीं। अभिनेत्री का मानना है कि यह किरदार उन्हें हर दिन कुछ नया सीखने का मौका दे रहा है।
छोटे शहर से आने वाले कलाकारों के संघर्ष पर बोलीं ईशा
अपने सफर को याद करते हुए ईशा ने बताया कि छोटे शहरों में आज भी एक्टिंग को एक स्थिर करियर के रूप में आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। खासकर लड़कियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई सवालों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने भी लोगों की आलोचनाएं सुनीं, लेकिन माता-पिता के समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।
आज ईशा सिंह अपनी मेहनत और लगन के दम पर मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। ‘जूही मुई’ उनके करियर का एक ऐसा पड़ाव है, जो न सिर्फ अभिनय की चुनौती है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की एक कोशिश भी है।
