अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी फिल्म ‘पेड्डी’ से जुड़े विवाद पर खुलकर बात की है। करण जौहर के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने उस अनुभव को असहज और परेशान करने वाला बताया। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि उस समय उन्हें अपनी बात ज्यादा मजबूती से रखनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, विवाद को लेकर अब भी उनके मन में पछतावा है और वह सोचती हैं कि उस समय हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।

फिल्म से जुड़े लोगों के कारण बोलने में हुई हिचकिचाहट
जाह्नवी ने बताया कि फिल्म पर बहुत से लोगों ने मेहनत की थी। इस वजह से वह विवाद के बारे में खुलकर बोलने से हिचकिचा रही थीं। किसी फिल्म से कई कलाकारों और तकनीकी सदस्यों की आजीविका जुड़ी होती है, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में अपनी बात रखना आसान नहीं होता। हालांकि, अभिनेत्री ने यह भी महसूस किया कि फिल्म से जुड़े किसी विषय पर असहमति होने पर चुप रहना हमेशा सही विकल्प नहीं होता।
‘मैं अपनी बात और मजबूती से रख सकती थी’
बातचीत के दौरान जाह्नवी ने माना कि वह अपने प्रभाव और विशेषाधिकार का बेहतर इस्तेमाल कर सकती थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था और अपनी चिंता को स्पष्ट तरीके से सामने रखना चाहिए था। अभिनेत्री के अनुसार, वह उस समय बड़ा कदम उठा सकती थीं और अपनी असहमति को ज्यादा मजबूती से व्यक्त कर सकती थीं। उनके इस बयान से पता चलता है कि वह उस अनुभव को अब पीछे मुड़कर अलग नजरिए से देखती हैं।
महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जताई चिंता
जाह्नवी ने यह भी स्वीकार किया कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली कहानियों और महिलाओं के चित्रण का समाज पर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, किसी दृश्य या कहानी को लेकर चिंता होने पर कलाकारों की जिम्मेदारी केवल अपने किरदार तक सीमित नहीं रह जाती। हालांकि, विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। जाह्नवी की इस स्वीकारोक्ति ने फिल्म जगत में कलाकारों की जिम्मेदारी, काम के दबाव और गलत लगने वाली चीजों के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत पर नई चर्चा शुरू कर दी है।


