थेवर जयंती पर उनकी प्रतिमा को पहनाया गया 13.5 किलो का स्वर्ण कवच

जयललिता द्वारा भेंट किया गया 13.5 किलो सोने का कवच थेवर जयंती पर मुथुरामलिंग थेवर की प्रतिमा को पहनाया गया। पसुम्पोन में तीन दिवसीय समारोह शुरू हुआ।

3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रामनाथपुरम (तमिलनाडु): दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता द्वारा थेवर जयंती और गुरु पूजा के लिए भेंट किया गया 13.5 किलोग्राम वजन का स्वर्ण कवच शुक्रवार को पसुम्पोन स्थित स्वतंत्रता सेनानी एवं आध्यात्मिक नेता मुथुरामलिंग थेवर के स्मारक में उनकी प्रतिमा पर पहनाया गया। मुथुरामलिंग थेवर की 119वीं जयंती और 64वीं गुरु पूजा के अवसर पर उनकी प्रतिमा को स्वर्ण कवच से सजाने की परंपरा उत्साहपूर्वक निभाई गई।
इस शुद्ध सोने के कवच को सोमवार को मदुरै के अन्ना नगर मेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा की तिजोरी से औपचारिक रूप से निकाला गया था। जयललिता ने वर्ष 2014 में इसे पसुम्पोन स्मारक को भेंट किया था।

अन्नाद्रमुक के कोषाध्यक्ष डिंडीगुल सी. श्रीनिवासन ने स्मारक की वंशानुगत संरक्षक गांधीमीनल नटराजन के साथ बैंक से संबंधित और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। इस दौरान राज्य के पूर्व मंत्री आर. बी. उदयकुमार और मणिकंदन सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद स्वर्ण कवच को कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से रामनाथपुरम जिले के पसुम्पोन गांव ले जाया गया। वहां तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत के अवसर पर इसे मुथुरामलिंग थेवर की आदमकद प्रतिमा पर विधिवत पहनाया गया। कवच को ले जा रहे वाहन के साथ किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।

आयोजकों के अनुसार, हजारों श्रद्धालुओं और राजनीतिक दलों के नेताओं के दर्शन एवं श्रद्धांजलि के लिए स्वर्ण कवच सप्ताहांत तक प्रतिमा पर लगा रहेगा। इसके बाद दो नवंबर को इसे सुरक्षित रूप से बैंक की तिजोरी में वापस रख दिया जाएगा। वर्ष 2014 में भेंट किए जाने के समय इस स्वर्ण कवच की कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसकी अधिक कीमत के कारण इसे पसुम्पोन स्मारक में स्थायी रूप से नहीं रखा जाता, बल्कि पूरे साल मदुरै में बैंक ऑफ इंडिया की निर्धारित तिजोरी में सुरक्षित रखा जाता है। हर साल जयंती समारोह से कुछ दिन पहले अन्नाद्रमुक के कोषाध्यक्ष और स्मारक के न्यासी कड़ी सशस्त्र सुरक्षा के बीच बैंक की तिजोरी से कवच निकालकर सड़क मार्ग से पसुम्पोन लाते हैं। तीन दिवसीय समारोह के दौरान इसे प्रतिमा पर पहनाया जाता है और समारोह संपन्न होने के बाद वापस बैंक की तिजोरी में सुरक्षित रख दिया जाता है।

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।