रांची: झारखंड में खरीफ-2026 फसलों के डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की धीमी प्रगति को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। तय समय सीमा के करीब पहुंचने के बावजूद राज्य में अब तक केवल 21.97 प्रतिशत सर्वे का कार्य ही पूरा हो सका है। इस सुस्त रफ्तार से नाराज कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव ने राज्य के सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर सर्वे कार्य में तेजी लाने और इसे मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

32.73 लाख भूखंडों के मुकाबले केवल 5.72 लाख का सर्वे
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में सर्वे के लिए कुल 32,73,739 गांव/प्रखंड क्षेत्र में से 26,943 गांवों को चिह्नित किया गया है। 2,60,75,447 प्लॉट सर्वे के दायरे में हैं, जिनमें से 25.48 लाख प्लॉट का सर्वे अनुमोदित हो चुका है, जबकि 2.61 लाख का कार्य प्रगति पर है। कुल मिलाकर 57.29 लाख प्लॉट का ही सर्वे पूरा हो पाया है। इस काम के लिए 20,901 सर्वेयर नामांकित किए गए थे, जिनमें से अब तक 6,042 वीएलई (VLE) सर्वेयर ही पंजीकृत हुए हैं। सरकार के आदेशानुसार 15 अक्टूबर तक सर्वे का काम हर हाल में पूरा किया जाना है, जबकि विभाग ने इसके लिए 30 सितंबर की समय सीमा तय की थी।
देवघर सबसे आगे, पश्चिमी सिंहभूम सबसे पीछे
जिलावार प्रगति रिपोर्ट पर नजर डालें तो देवघर जिला 58.73% सर्वे पूरा कर राज्य में सबसे आगे है। इसके बाद चतरा (45.30%) और लोहरदगा (57.67%) का प्रदर्शन भी बेहतर रहा है। वहीं दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम मात्र 3.65% काम के साथ सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। खूंटी में 6.42% और पलामू में 7.32% ही सर्वे हो पाया है।
तकनीकी खामियां और नेटवर्क बने बड़ी बाधा
डिजिटल क्रॉप सर्वे की सुस्त चाल के पीछे कई जमीनी और तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। सर्वे का काम ऑनलाइन मोड में मोबाइल ऐप के जरिए होना है, लेकिन झारखंड के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क न मिलने से काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रति प्लॉट सर्वे के लिए सर्वेयरों को मात्र छह रुपये दिए जाते हैं, जिसके कारण वीएलई (VLE) इस कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं। नए नियम के तहत पहले से काम कर रहे सर्वेयरों को एग्रीस्टैक आईडी बनानी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे आईडी कन्वर्जन में भारी परेशानी आ रही है और काम रुक रहा है। राज्य में हुई लगातार बारिश के कारण भी सर्वेयरों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है।
क्या है डिजिटल क्रॉप सर्वे
डिजिटल क्रॉप सर्वे एक ऐसी आधुनिक व्यवस्था है जिसमें जीपीएस और जीयो-टैगिंग तकनीक के जरिए खेतों में बोई गई फसलों का सटीक आंकड़ा जुटाया जाता है। इससे सरकार को वास्तविक फसल क्षेत्र और उत्पादन का सटीक विवरण मिलता है, जिसका सीधा इस्तेमाल फसल बीमा, कृषि ऋण, आपदा राहत और अनुदान वितरण में होता है। आंकड़ों में पारदर्शिता आने से कागजी गड़बड़ियां समाप्त होंगी और किसानों को समय पर सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।


