डॉ. अंसारी ने कहा कि गरीब, आदिवासी, दलित, मुस्लिम, मूलवासी और अन्य आम नागरिकों को दस्तावेज तैयार करने के लिए अपने कामकाज से समय निकालना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में फॉर्म और दस्तावेज की आवश्यकता होने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।

प्रक्रिया नहीं रुकी तो आंदोलन की चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि SIR की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी योग्य मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी उठाए सवाल
डॉ. अंसारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने मीडिया में आई उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मतदाता सूची, Form-6 और चुनावी डेटा से संबंधित कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR सहित सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
डॉ. अंसारी ने कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने SIR की प्रक्रिया की पारदर्शी तरीके से समीक्षा किए जाने की मांग भी की।


