
रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने उच्च विद्यालय शिक्षक नियुक्ति मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संबंधित सभी अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का आदेश दिया है। यह आदेश W.P.(S) No. 4210/2024 एवं उससे जुड़े अन्य मामलों में न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया। अदालत के इस निर्णय से लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
यह पूरा मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित उच्च विद्यालय शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। आयोग ने कई अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि उन्होंने स्नातकोत्तर (PG) और B.Ed. की डिग्री एक ही शैक्षणिक सत्र में प्राप्त की है, जो आयोग के अनुसार नियमों के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।
आयोग के इस निर्णय के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम ने न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त डिग्रियां मान्यता प्राप्त संस्थानों से हैं और उनकी वैधता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। केवल तकनीकी आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द करना संविधान के समानता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम ने यह भी तर्क दिया कि अभ्यर्थियों ने निर्धारित योग्यता पूरी की है तथा नियुक्ति प्रक्रिया के सभी चरणों में सफलता प्राप्त की है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि दोनों डिग्रियां एक ही सत्र में प्राप्त की गई हैं, उन्हें नौकरी से वंचित करना अन्यायपूर्ण होगा। इस दौरान उनके जूनियर अधिवक्ता योगेन्द्र यादव ने भी मामले में सक्रिय सहयोग किया।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभ्यर्थियों की याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रखना उचित नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने आयोग एवं संबंधित अधिकारियों को सभी योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले को राज्य में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है जो लंबे समय से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। वहीं, इस फैसले के बाद अब आयोग और राज्य सरकार पर जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

