इरफान अंसारी ने निशिकांत दुबे पर साधा निशाना, सांसद पद से बर्खास्तगी की मांग

News Aroma
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Jamtara News: झारखंड के मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने जामताड़ा में 19 अप्रैल, 2025 को आयोजित एक प्रेस वार्ता में गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना के खिलाफ दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की। अंसारी ने इसे भारतीय लोकतंत्र, संविधान, और न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया और दुबे की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग की।

इरफान अंसारी ने कहा, “निशिकांत दुबे का बयान सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और लोकतंत्र की बुनियाद को हिलाने वाला है। BJP अब न्यायपालिका को अपनी कठपुतली बनाना चाहती है, जो बेहद खतरनाक संकेत है। यदि आज देश नहीं जागा, तो BJP संविधान और कानून व्यवस्था को भी खरीद लेगी। ये लोग जातिगत जहर घोलकर न्यायपालिका को बदनाम कर रहे हैं।”
अंसारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की कि निशिकांत दुबे को तत्काल संसद सदस्यता से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू हो। उन्होंने कहा, “विधायिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका के बीच संतुलन लोकतंत्र का आधार है। जब सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला होगा, तो लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं बचेगा।”

निशिकांत दुबे ने क्या कहा?

निशिकांत दुबे ने जामताड़ा में एक प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट पर “धार्मिक युद्ध भड़काने” और “अपनी सीमा से बाहर जाने” का आरोप लगाया। उन्होंने CJI संजीव खन्ना को “देश में गृह युद्ध” के लिए जिम्मेदार ठहराया। दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों, खासकर वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की सुनवाई और राष्ट्रपति को विधेयकों पर तीन महीने में निर्णय लेने के निर्देश पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है, तो संसद और विधानसभाएं बंद कर देनी चाहिए।”

दुबे ने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर, ज्ञानवापी, और मथुरा जैसे मामलों में दस्तावेज मांगता है, लेकिन वक्फ संपत्तियों पर सवाल नहीं उठाता। उन्होंने अगले संसद सत्र में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को फिर से लाने की बात कही ताकि “न्यायाधीशों की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद” रोका जा सके।

BJP ने बनाई दूरी, विपक्ष का हमला

BJP ने दुबे के बयान से तुरंत दूरी बना ली। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “निशिकांत दुबे का बयान उनकी व्यक्तिगत राय है, जिसे BJP पूरी तरह खारिज करती है। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और इसके आदेशों को स्वीकार करते हैं।” नड्डा ने सभी नेताओं को भविष्य में ऐसे बयानों से बचने की हिदायत दी।

विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, “BJP की मंशा सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने की है। यह संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सपनों पर हमला है।” AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दुबे को “ट्यूबलाइट” कहकर तंज कसा और कहा, “BJP धार्मिक युद्ध की धमकी देकर सुप्रीम कोर्ट को डराना चाहती है।” AAP की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की, जबकि कांग्रेस के जयराम रमेश ने इसे “न्यायपालिका पर सुनियोजित हमला” करार दिया।

अवमानना कार्यवाही की संभावना

सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) के तहत दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है। तनवीर ने कहा कि दुबे का बयान “सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को कम करने और जनता में इसके प्रति अविश्वास पैदा करने” का प्रयास है।

 

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अटॉर्नी जनरल अनुमति देते हैं, तो दुबे के खिलाफ अवमानना का मामला चल सकता है, जिसमें जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज संतोष स्नेही मान ने कहा, “ऐसे बयान संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव को बढ़ावा देते हैं। सुप्रीम कोर्ट को इसकी गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाना चाहिए।”

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