रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और धांधली के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सीआईडी द्वारा अब तक की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा (शपथपत्र) दायर किया है। सरकार ने अदालत में स्पष्ट कर दिया है कि 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक में बिकने वाली परीक्षा के जरिए नियुक्त हुए लोगों को पद पर बनाए नहीं रखा जा सकता। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि सीआईडी जांच में कई ऐसे अहम तथ्य और सबूत मिले हैं, जिनसे साफ होता है कि पूरी परीक्षा प्रणाली ही दूषित थी। कानून के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि धोखाधड़ी और जालसाजी हर प्रक्रिया को अमान्य कर देती है। परीक्षा में केवल सफल हो जाना या नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लेना किसी भी अभ्यर्थी को पद पर बने रहने का पूर्ण अधिकार नहीं देता है। विज्ञापन के नियमों के तहत भी सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देना या न देना सरकार का अधिकार है।
अब तक 28 आरोपी गिरफ्तार, 265 को नोटिस
मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अब तक 28 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि परीक्षा में सफल हुए 265 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जा रही है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा संचालित करने वाली कंपनी ‘आईसीएन’ के संचालक की साठगांठ से अभ्यर्थियों को कोलकाता, बिहार और नेपाल ले जाकर उत्तर रटवाए गए थे। ऐसे 28 अभ्यर्थियों में से 10 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन भी हो गया था। फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की भूमिका और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच जारी है।
79 याचिकाओं के खिलाफ सरकार का रुख सख्त
11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (जेपीएससी) परीक्षा की नियुक्तियों को रद्द करने के खिलाफ दायर 79 याचिकाओं को सरकार ने खारिज करने की मांग की है। सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि प्रशासनिक सेवा किसी भी राज्य की रीढ़ होती है। 79 व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं के निजी हितों की तुलना में राज्य की प्रशासनिक सेवाओं की पवित्रता, शुचिता और उन लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकार कहीं अधिक महत्वपूर्ण और बड़े हैं, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा दी थी।


