
Jharkhand Solar Scheme : महुआडांड़ प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों को स्थायी बिजली देने के उद्देश्य से शुरू की गई JREDA की सोलर ऊर्जा योजना पूरी तरह विफल साबित हुई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आज हालात जस के तस हैंसोहर,केराखाड़, ओरसा, जामडीह सहित दर्जनों गांवों में लगे सोलर पैनल और बैटरी अब शोपीस बनकर रह गए हैं।
शुरुआत में उम्मीद, अब मायूसी
सरकार ने JREDA के माध्यम से इस योजना को लागू किया था। योजना के तहत हर घर में सोलर पैनल, बैटरी और एलईडी लाइट लगाकर कनेक्शन दिया गया। शुरुआत में 2 से 3 घंटे बिजली मिलने से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी। लेकिन कुछ ही महीनों में आधे से अधिक घरों में आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। न बैटरी चार्ज हो रही है, न पैनल काम कर रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और JREDA के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई मरम्मत दल नहीं पहुंचा। नतीजतन ग्रामीण फिर से लालटेन और टॉर्च पर निर्भर हो गए हैं।
जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
जब जिम्मेदार एजेंसी अपने ही प्रखंड कार्यालय की व्यवस्था 6 महीने में बहाल नहीं कर सकी, तो सवाल उठता है कि दूर-दराज के गांवों की निगरानी कौन करेगा? ग्रामीणों का आरोप है कि योजना बनाते समय रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा सामने है – लाखों खर्च के बाद भी अंधेरा।
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, JREDA और ऊर्जा विभाग से मांग की है कि:पूरी योजना की उच्चस्तरीय जांचकराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो,सभी खराब पड़े सिस्टमों की मरम्मत कर नियमित आपूर्ति शुरू की जाए,रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाय

