
रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिसूचना जारी होने के पहले दिन किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। महागठबंधन की ओर से एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का उम्मीदवार उतारना लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी मंगलवार को अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर सकती है।
विकल्पों पर विचार कर रही भाजपा
उधर भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास फिलहाल जीत के लिए जरूरी संख्या से कम विधायक हैं, ऐसे में पार्टी अतिरिक्त समर्थन जुटाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। अब सभी की नजरें महागठबंधन की दूसरी सीट पर फैसले पर टिकी हैं, जिससे चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
समझिए NDA की गणितीय चुनौती
NDA (भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा) के पास कुल 24 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए उसे चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि NDA की रणनीति निर्दलीय विधायकों और क्रॉस वोटिंग पर निर्भर हो सकती है।
महागठबंधन की मजबूत स्थिति
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं, जिससे गठबंधन दो सीटों पर मजबूत स्थिति में माना जा रहा है। हालांकि, सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर अंदरूनी चर्चा अभी भी जारी है।

