
झारखंड से राज्यसभा के लिए एक उम्मीदवार तो जेएमएम का होगा, बस यहीं तक तस्वीर साफ़ है। बाक़ी जो तस्वीर ब्लर है वह मनोरंजक है। दूसरी सीट के लिए काँग्रेस लगभग रिगिया रही है। फुसफुसाहट तो यहां तक है कि काँग्रेस ने यहॉं तक निवेदन कर दिया है कि उनके उम्मीदवार भी हेमंत सोरेन ही छाँटकर दें। यहां तक तो फिर भी ठीक है। लेकिन हंसी तो तब आई जब दो विधायकों वाली पार्टी ने भी उस सीट के लिए मॉंग रख दी। अभी तो मुझे चार विधायकों वाली आरजेडी के सपने का इंतज़ार है।
अब आइये असली बात पर। असल में राज्यसभा का चुनाव दो साल में एक बार होता है लेकिन इस त्यौहार में कई वोटर नेताओं के लिए पॉंच साल के राशन पानी की व्यवस्था हो जाती है। तो ये जो इमेज को ब्लर किया जा रहा है न ये असल में वोटों की नीलामी के लिए बोली लगाने के लिए है। क्यूँकि अंतरात्मा की आवाज़ ऐसे ही थोड़ी न निकलती है। मोल तो लगता है उनका भी। वोटिंग के दिन नदारद रहना भी अंतरात्मा कैटेगरी में ही आता है।
सुनने में तो ये भी आ रहा है कि कोई निर्दलीय उम्मीदवार हैं जिनके आने की सुगबुगाहट भर से ही नेताजी लोग अपनी शॉपिंग लिस्ट बनाना शुरू कर देते हैं। मेरा तो मानना साफ़ है, क्रास वोटिंग तो होगी। टिकट कांग्रेस को मिला तो जेएमएम और दूसरे सहयोगी दलों में अंतरात्मा की आवाज़ गूँजेगी, वहीं यदि उल्टा हुआ तो अंतरात्मा कांग्रेसियों के पास भी है। रही बात बीजेपी की तो वह मजे ले रही है। कई बार तो मजे-मजे में उनके लोग राज्यसभा पहुंच जाते हैं। वैसे हक की बात कीजिए तो कांग्रेस का एक उम्मीदवार राज्यसभा जाना चाहिए।

