JMM ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग पर खड़ा किया सवाल

News Aroma
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JMM Questioned Election Commission: लोकसभा चुनाव नजदीक है। इसे लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) की टीम ने अभी तक झारखंड का दौरा नहीं किया है। ऐसे में झामुमो (JMM) ने इस पर सवाल खड़ा कर दिया है।

झामुमो (JMM) के महासचिव और केंद्रीय प्रवक्ता Supriyo Bhattacharya ने कहा है कि चुनाव आयोग की टीम झारखंड आये। यहां आकर वह हमारी राय ले। हमें जरूरी दिशा-निर्देश भी दे।

Supriyo Bhattacharya ने कहा कि अगले सप्ताह लोकसभा चुनाव की घोषणा होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि वह अचंभित हैं कि अभी तक चुनाव आयोग की टीम ने झारखंड का दौरा नहीं किया है। पिछली बार 10 मार्च को 14वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव की अधिसूचना जारी हुई थी। उस वक्त चुनाव आयोग की टीम फरवरी में रांची आयी थी और यहां दो दिन बिताये थे।

पहले दिन राज्य के प्रशासनिक पदाधिकारियों समेत प्रत्यक्ष तौर पर चुनाव से जुड़े अफसरों के साथ बातचीत की थी। वहीं, दूसरे दिन राजनीतिक दलों से एक-एक कर बात की थी। चुनाव को लेकर राय ली गयी थी। सुप्रियो ने कहा कि चुनाव लड़ रहीं पार्टियां भी स्टेक होल्डर हैं। इस बार वह परंपरा छूटती नजर आ रही है।

Supriyo ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त तो रांची में मुख्य निर्वाची पदाधिकारी के तौर पर भी रहे हैं। रांची के डीसी भी रहे। रियाडा के प्रबंध निदेशक भी रहे थे। झारखंड से उनका जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनका भी झारखंड नहीं आना संदेह पैदा करता है।

हमारे स्टार प्रचारकों को रोका जाता था

Supriyo Bhattacharya ने पार्टी के स्टार प्रचारकों को रोके जाने का भी आरोप लगाया। कहा कि ऐसा हर बार देखा गया है। खासकर 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में JMM के स्टार प्रचारकों को रोक दिया जाता था। कहा जाता था कि फलां जगह पर BJP के स्टार प्रचारक PM Narendra Modi प्रचार करेंगे, ऐसे में उस जगह को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया जाता था। लोगों से कनेक्ट होने में रुकावटें पैदा की गयीं।

सुप्रियो ने कहा कि झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं और इन पर पिछली बार सात चरणों में चुनाव हुआ था। लेकिन, उत्तर प्रदेश (UP) में 80 सीटों पर महज चार चरणों में ही चुनाव संपन्न करा दिये गये। सुप्रियो ने कहा कि हम आर्थिक रूप से कमजोर हैं, ऐसे में हमारी प्रतिद्वंद्विता भी कमजोर हो जाये, इसीलिए ऐसा किया गया। उसी का नतीजा था कि BJP के प्रति एक पक्षीय मतदान हुआ, जो चिंता बढ़ाने का कारण है।

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