
रांची: झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा (विज्ञापन संख्या 01/2024) के परिणाम को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में नियुक्त हो चुके सभी 342 सफल अभ्यर्थियों के आग्रह को स्वीकार करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 5 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अदालत में सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष मजबूत करने के लिए जवाब दाखिल करने हेतु समय की मांग की थी, जिसे पीठ ने मंजूर कर लिया। जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा। इससे पूर्व 21 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सभी 342 सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने और उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था, क्योंकि राज्य सरकार इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर चुकी है।
यह पूरा विवाद एकल पीठ के उस फैसले को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे अय्यूब तिर्की, राजेश प्रसाद, रिंकू कुमारी, विकास चंद्रा व अन्य ने अलग-अलग अपील याचिकाओं के माध्यम से दायर किया है। इसके साथ ही एक अंतरिम आवेदन (IA) दायर कर परिणाम को पूरी तरह रद्द करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नियमों के विरुद्ध किया है। उनका कहना है कि परीक्षा नियमावली में डिजिटल मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं था, फिर भी आयोग ने ऐसा कराया। इसके अलावा नियमावली के तहत मूल्यांकन कम से कम 10 वर्षों के अनुभव वाले अनुभवी शिक्षकों से कराया जाना चाहिए था, जबकि आयोग ने मात्र दो-तीन वर्षों के अनुभव वाले घंटी आधारित, संविदा व गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों से उत्तर पुस्तिकाएं जांच करवाईं।

