रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं, मेधा घोटाले और ओएमआर शीट में हेरफेर के मामले में सीआईडी (CID) ने अपनी जांच तेज करते हुए विशेष अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। सीआईडी ने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और तत्कालीन पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कुल 12 आरोपियों को इस घोटाले में नामजद किया है। अपर न्यायायुक्त प्रथम की अदालत में अवकाश के दौरान जांच अधिकारी द्वारा यह चार्जशीट दाखिल की गई। यदि चार्जशीट दाखिल करने में एक भी दिन की देरी होती, तो 12 में से 5 आरोपी डिफ़ॉल्ट बेल (जमानत) पाने के हकदार हो जाते। अब इस मामले पर विशेष अदालत में अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

परीक्षा प्रक्रिया, ओएमआर शीट और गोपनीय दस्तावेजों में हेरफेर
सीआईडी की जांच में जेपीएससी के पूर्व पदाधिकारियों और परीक्षा का संचालन करने वाली निजी एजेंसी टीपीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात उजागर हुई है। आरोप है कि परीक्षा की प्रक्रिया में धांधली की गई, ओएमआर शीट में बदलाव किए गए और परीक्षा परिणामों में डिजिटल हेरफेर के जरिए चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) की परीक्षाओं में अंकित ओएमआर शीट उत्तर पुस्तिकाओं को परिसर से बाहर ले जाया गया था। इतना ही नहीं, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने 26 मई 2026 को व्हाट्सएप के माध्यम से परीक्षा की उत्तर-कुंजी टीडीपीएल के कर्मचारी मो. उस्मान को भेजी थी।
अभय तिवारी के खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन
जांच एजेंसी ने टीडीपीएल एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की भूमिका को काफी संदिग्ध पाया है। अभय तिवारी के बैंक खातों से कई संदेहास्पद वित्तीय लेनदेन पाए गए हैं, जिनमें टीडीपीएल के निदेशकों के होटल खर्च का भुगतान और अभ्यर्थियों से कथित लेन-देन शामिल है। अभय तिवारी इस पूरे मामले में आयोग, परीक्षा कराने वाली एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच मध्यस्थ (बिचौलिए) की भूमिका निभा रहा था।
22 जुलाई से शुरू हुई थीं गिरफ्तारियां
इस प्रकरण में सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है। जांच के दौरान पहली गिरफ्तारी 22 जुलाई 2026 को हुई थी, जिसमें पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, अभय कुमार तिवारी, मो. उस्मान और मो. एबाद को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 24 जुलाई को हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार और सोनू कुमार गिरफ्तार हुए। 25 जुलाई को अरविंद कुमार, 30 जुलाई को सुमन सौरभ और 10 अगस्त को पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते की गिरफ्तारी हुई थी। फिलहाल सभी 12 आरोपी जेल में बंद हैं। सीआईडी इस मामले में जल्द ही दो दर्जन से अधिक अन्य आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट भी दाखिल करने की तैयारी कर रही है।


