
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। राज्य गठन के समय लोगों को उम्मीद थी कि नई व्यवस्था के तहत सरकारी नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होंगी। लेकिन समय-समय पर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। प्रथम, द्वितीय, तृतीय सिविल सेवा परीक्षा से लेकर वर्ष 2008 की व्याख्याता नियुक्ति तक कई मामलों को लेकर आयोग विवादों में रहा है।
अब हाल के घटनाक्रम के बाद एक बार फिर JPSC की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। समाचार माध्यमों में आई रिपोर्टों के अनुसार, JPSC द्वारा आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा (JET), सिविल सेवा, APP, सिविल जज और वन विभाग जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया आवेदन से लेकर परिणाम तक एक कथित विवादित और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी (TDPL) के माध्यम से संचालित की गई। आरोप है कि आयोग के तत्कालीन नेतृत्व के दौरान कई फैसले गोपनीयता के नाम पर लिए गए और सदस्यों को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया, जिससे परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।
JET परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग
नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ के डॉ. त्रिभुवन कुमार साही ने मांग करते हुए कहा कि जिस एजेंसी पर सवाल उठ रहे हैं, उसके जरिए कराई गई सभी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विशेष रूप से झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) को लेकर आशंका जताई गई है कि यदि यही प्रक्रिया जारी रही तो परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में JET परीक्षा को तत्काल रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है।
2008 जैसी स्थिति दोबारा बनने का डर
डॉ. त्रिभुवन कुमार साही का कहना है कि यदि बिना किसी सुधार और निष्पक्ष जांच के परीक्षाएं कराई जाती हैं, तो राज्य में वर्ष 2008 के व्याख्याता नियुक्ति विवाद जैसी स्थिति फिर से पैदा हो सकती है। उनका मानना है कि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन अभ्यर्थियों को होगा, जो पूरी मेहनत और ईमानदारी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
9 वर्षों से सेवा दे रहे नीड बेस्ड शिक्षकों को स्थायी करने की मांग
मांग पत्र में झारखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। बताया गया है कि वर्ष 2017 से सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी और तब से वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दावा किया गया है कि सभी नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक NET, JET और Ph.D. जैसी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं। इसके अलावा उनके पास उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करीब नौ वर्षों का अनुभव भी है और उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अबुआ सरकार से की गई ये अपील
नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ के डॉ. त्रिभुवन कुमार साही ने राज्य सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि विवादित एजेंसी के माध्यम से कराई गई सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन परीक्षाओं की प्रक्रिया पर संदेह है, उन्हें रद्द कर युवाओं के भविष्य की रक्षा की जाए। इसके साथ ही सरकार से यह भी आग्रह किया गया है कि वर्षों से सेवा दे रहे योग्य और अनुभवी नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों को प्राथमिकता देते हुए स्थायी नियुक्ति दी जाए। उनका तर्क है कि जब राज्य में पहले से NET, JET और Ph.D. जैसी योग्यताएं रखने वाले अनुभवी शिक्षक उपलब्ध हैं, तो नई विवादित प्रक्रियाओं पर समय और संसाधन खर्च करने के बजाय उन्हें नियमित करना शिक्षा व्यवस्था और राज्य दोनों के हित में अधिक उचित कदम होगा।

