रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली और अनियमितताओं की सीआईडी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सीआईडी के अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि विभिन्न परीक्षा एजेंसियां आपस में सांठगांठ कर एक गिरोह की तरह परीक्षाओं में सक्रिय थीं।

अनुसंधान के अनुसार, 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के संचालन का मुख्य जिम्मा ‘आईटीआई लिमिटेड’ को दिया गया था। हालांकि, मुख्य परीक्षा के नतीजे आने के बाद अभय तिवारी के सिंडिकेट के माध्यम से ‘टीडीपीएल’ को अंतिम परिणाम तैयार करने और इंटरव्यू आयोजित करने का काम सौंप दिया गया था। जांच के दायरे में सबसे पहले ‘टीडीपीएल’ आई, जिसके बाद बंगाल सरकार की आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘आईसीएसएन’ की भूमिका उजागर हुई। इन दोनों एजेंसियों के बीच तालमेल बैठाने में अभय तिवारी मुख्य कड़ी साबित हुआ, जबकि मिथिलेश सिंह की भूमिका सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आई है। इसके अतिरिक्त, आईसीएसएन के निदेशकों के तार ‘बिनसिस’ कंपनी के अरुण कुमार शर्मा से भी जुड़े थे, जिसे जेएसएससी जूनियर इंजीनियर बहाली मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जेपीएससी मामले में भी सीआईडी ने रिमांड पर लिया था।
मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईडी ने ‘आईटीआई लिमिटेड’ के झारखंड प्रतिनिधि निजेश कृष्णा कुमार को गिरफ्तार किया है। बुधवार को विशेष अदालत से मंजूरी मिलने के बाद आरोपी को तीन दिनों की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान निजेश कृष्णा ने परीक्षा में हुई धांधली और अनियमितताओं को स्वीकार किया है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कृष्णा का संबंध परीक्षा में गड़बड़ी करने वाली अन्य एजेंसियों के साथ भी था। सीआईडी को 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ जारी है, ताकि इस पूरे परीक्षा सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों और कड़ियों का पर्दाफाश किया जा सके।


