
करीब दो दशक से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहीं अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इन दिनों वह अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर सुर्खियों में हैं। एक बातचीत के दौरान कंगना ने बॉलीवुड के कथित ‘बैन कल्चर’, शादी, जीवनसाथी और महिलाओं को लेकर समाज की सोच पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका मानना है कि सफलता के साथ व्यक्ति की सोच और प्राथमिकताएं भी बदलती हैं और समाज को भी महिलाओं के प्रति अपना नजरिया बदलने की जरूरत है।
जीवनसाथी ऐसा हो जो उपलब्धि समझे
कंगना रनौत ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें विवाह संस्था पर पूरा विश्वास है, लेकिन हर व्यक्ति की अपनी सही टाइमिंग होती है। उन्होंने बताया कि युवावस्था में उनका पूरा ध्यान अपने करियर और आत्मनिर्भर बनने पर था। अब उन्हें लगता है कि जीवन में ऐसा साथी होना चाहिए, जो उनकी उपलब्धियों पर गर्व करे और उनके व्यक्तित्व को समझे। कंगना के अनुसार, उम्र के साथ इंसान अपनी प्राथमिकताएं बदलता है और मानसिक शांति तथा आपसी सम्मान सबसे ज्यादा मायने रखने लगते हैं।
‘बॉलीवुड का बैन कल्चर बुलिंग जैसा है’
हाल ही में अभिनेता रणवीर सिंह को मिले नॉन-कोऑपरेटिव नोटिस के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने के बाद कंगना ने बॉलीवुड में बढ़ते ‘बैन कल्चर’ पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में गुटबाजी पहले भी थी, लेकिन अब यह पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ रही है। उनके मुताबिक कई कलाकार इस बारे में अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अभिनेत्री ऐश्वर्या राय ने भी एक समय अपने करियर में ऐसे दौर का जिक्र किया था, जब अचानक उनके पास काम की कमी हो गई थी। कंगना का मानना है कि किसी कलाकार को व्यवस्थित तरीके से नजरअंदाज करना भी एक तरह की सांस्कृतिक बुलिंग है।
महिलाओं को लेकर सोच बदलने की जरूरत
कंगना ने महिलाओं के प्रति समाज की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाओं को अक्सर उनके व्यक्तित्व के बजाय उनकी बाहरी छवि और पहनावे के आधार पर आंका जाता है। यदि कोई महिला सजती-संवरती है या आत्मविश्वास के साथ खुद को प्रस्तुत करती है, तो उसके चरित्र को लेकर तरह-तरह की धारणाएं बना ली जाती हैं। उनका कहना है कि यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित समाजों में भी देखने को मिलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी महिला के कपड़ों, उम्र या स्टाइल को उसके चरित्र से जोड़ना पूरी तरह गलत सोच है।
आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी पहचान
कंगना रनौत का मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद और व्यक्तित्व के अनुसार जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए किसी की स्वीकृति की जरूरत नहीं होनी चाहिए। आत्मविश्वास, मेहनत और अपनी शर्तों पर जीने की सोच ही किसी व्यक्ति की असली ताकत होती है। उनका संदेश साफ है कि चाहे निजी जीवन हो या पेशेवर दुनिया, सम्मान और समान अवसर हर किसी का अधिकार है।

