एक गांव, जहां पहुंचने के लिए रास्ता नहीं, घर में कराना पड़ा महिला का प्रसव

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Woman had to Deliver at Home: चारों तरफ विकास की बातें होती है, तो दूसरी तरफ जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां अभी तक विकास की सड़क नहीं पहुंच सकी है।

सरकार संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास कर रही है और इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी दे रही है लेकिन गांव तक जाने के लिए पुल नहीं होने के कारण तोरपा प्रखंड के जिलिंगबुरु गांव की मेरी सुरीन का प्रसव घर में ही कराया गया।

नाले पर नहीं बनी पुलिया

जिलिंगबुरु गांव (Jilingburu Village) जाने के रास्ते में नाला पर बना पुल वर्षों टूटा पड़ा है। नाला में पानी भरा होने के कारण गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाता है। जिलिंगबुरु गांव की मेरी सुरीन को शनिवार को प्रसव पीड़ा हुई।

इसकी जानकारी सहिया को मिली लेकिन पुल के अभाव में उसे स्वास्थ्य उपकेंद्र तक लाना मुश्किल था। बाद में ANM रूपा रानी तिग्गा, सहिया प्यारी केरकेट्टा तथा आंगनबाड़ी देविका शिलवंती कोनगाडी मेरी के घर पहुंची तथा उसका सुरक्षित प्रसव (Delivery) कराया। मेरी को पुत्र की प्राप्ति हुई।

उल्लेखनीय है कि रोन्हे से जिलिंगबुरु जाने के रास्ते में नाले पर पुल बनाने की मांग ग्रामीण एक वर्ष से भी अध्किा समय से कर रहे हैं। यहां बनी पुलिया बरसात में टूटकर बह गयी है। पुल नहीं होने के कारण चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता है।

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