लेह/जम्मू : लद्दाख में केसर की प्रायोगिक खेती के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को कहा कि लेह में हाल में बहाल की गई बंजर भूमि पर फूल खिलने के पहले चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर एकत्र किया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि फूल रिकॉर्ड 30 दिनों में ही खिल गए, जबकि आमतौर पर इसमें करीब दो महीने लगते हैं। यह केंद्र शासित प्रदेश में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कृषि की संभावनाएं तलाशने के प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रायोगिक केसर खेती परियोजना की शुरुआत दो अक्टूबर को की गई थी। इसका उद्देश्य भारत के ऊंचाई वाले ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू करना है। यह पहल क्षेत्र में लिलियम की खेती की सफलता पर आधारित है।

इस परियोजना के तहत लद्दाख की ऊंचाई और कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल ईरान से लाए गए करीब 90 हजार उच्च गुणवत्ता वाले केसर के कंदों में से लगभग 800 किलोग्राम कंद लेह जिले के स्पितुक फरका में पहले बंजर रही 4,000 वर्ग मीटर भूमि पर लगाए गए। उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “लद्दाख के ऊंचाई वाले कृषि क्षेत्र में एक नयी शुरुआत! यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि लेह में हाल ही में बहाल की गई बंजर भूमि पर केसर की प्रायोगिक खेती में फूल खिलने शुरू हो गए हैं। पहली बार फूल खिलने में आमतौर पर लगने वाले दो महीने के मुकाबले रिकॉर्ड 30 दिनों का समय लगा।”
केसर के फूलों को देखने और खेत का निरीक्षण करने आए सक्सेना ने कहा कि रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं, जबकि एक दिन सुबह 72 फूल खिले थे। उन्होंने कहा, “सिर्फ चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर एकत्र किया गया है।” इस उपलब्धि को पर्यावरणीय लचीलेपन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती की अप्रयुक्त संभावनाओं का प्रमाण बताते हुए उन्होंने कहा, “इस पहल से कृषि विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता और आजीविका सृजन के नये रास्ते खुलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर लद्दाख के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।”


