
लातेहार : जहां चाह, वहां राह की कहावत को चरितार्थ करती एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत प्रखंड के परहा टोली पंचायत के शाहपुर टोला दातुखाड़, धुरलेटा से हुई है। प्रखंड मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में दशकों से विकास का सूरज उगने का इंतजार कर रहे कोरवा-बिरजिया आदिम जनजाति के 20-25 परिवारों के लिए अब सुनहरे कल की पटकथा लिखी जा रही है। गांव की मिट्टी, गांव का दर्द समझने मुखिया रीता खलखो खुद जब दातुखाड़ पहुंचीं, तो गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। 80 मतदाताओं वाले इस टोले में पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने चौपाल लगाकर एक-एक परिवार की समस्या को न सिर्फ सुना, बल्कि समाधान का संकल्प भी लिया। मुखिया ने भरे मन से कहा, यह मेरे पंचायत का हिस्सा है, मेरा परिवार है। कोरवा-बिरजिया समाज हमारी धरोहर है। इनके चेहरे पर मुस्कान लाना मेरा पहला कर्तव्य है। आज हमने ग्राम सभा में तय किया है कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और रोजगार – हर मोर्चे पर दातुखाड़ को मॉडल बनाएंगे। सरकार तक हम पूरी ताकत से आवाज पहुंचाएंगे।
पंचायत सेवक ने दिखाया रोडमैप, ‘अब होगा काम’
पंचायत सेवक मनोज कुमार प्रसाद ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए विकास का पूरा खाका रखा। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी का सपना है कि कोई भी आदिम जनजाति परिवार विकास से वंचित न रहे। दातुखाड़ के लिए हम मनरेगा से बारहमासी सड़क, जल जीवन मिशन से हर घर नल, डीएमएफटी फंड से सोलर लाइट और बिरसा हरित ग्राम योजना से फलदार पौधे का प्रस्ताव तुरंत तैयार कर रहे हैं। यह गांव अब तस्वीर बदलेगा।” आज जहां ग्रामीण ‘चुआ’ के भरोसे हैं, कल वहां हर घर में नल से जलधारा बहेगी। जहां अंधेरा है, वहां सोलर की रोशनी जगमगाएगी। कच्ची पगडंडियों की जगह पक्की सड़क पर बच्चों के स्कूल जाने के सपने दौड़ेंगे। एक स्कूल के साथ अब आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सुविधा की भी नींव रखी जाएगी।
80 वोटर, अब 80 संकल्प
इस गांव के 80 मतदाता अब सिर्फ वोटर नहीं, ‘विकास के ब्रांड एंबेसडर’ बनेंगे। ग्रामीणों की आंखों में पहली बार शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास की चमक दिखी। बुजुर्गों ने कहा, “रीता दीदी ने हमारे दर्द को अपना समझा, अब लगता है कि अच्छा दिन आएगा।”
नए युग का सूत्रपात
यह पहल पूरे लातेहार के लिए मिसाल है। जब मुखिया संवेदनशील हो और पंचायत सेवक कर्मठ, तो 5 किलोमीटर की दूरी मायने नहीं रखती। विकास की यह गंगा अब धुरलेटा के दातुखाड़ से बहेगी और पूरे परहाटोली पंचायत को सींचेगी।
आदिम जनजाति का गौरव, महुआडांड़ का गौरव
यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के महामंत्र की जीत है। दातुखाड़ ,धुरलेटा अब मजबूरी का नहीं, मजबूत इरादों का प्रतीक बनेगा।

