
लातेहार : महुआडांड़ सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचे, यह प्रशासन की प्राथमिकता है। लेकिन नेतरहाट की आदिम जनजाति समुदाय से आने वाली एक विधवा महिला महीनों से पारिवारिक पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। मामला सरकारी कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को भी रेखांकित करता है। जामटोली गांव निवासी महेश्वरी देवी के पति स्वर्गीय शैलेंद्र बिरजिया शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त शिक्षक और पेंशनधारी थे। 9 जनवरी 2026 को उनके निधन के बाद महेश्वरी देवी ने पारिवारिक पेंशन के लिए सभी जरूरी कागजात तैयार कर नेतरहाट स्थित बैंक में जमा किए।
महेश्वरी देवी का कहना है कि बैंक से उन्हें लातेहार कोषागार भेजा गया। कोषागार में दस्तावेज जमा करने पर बताया गया कि मामला रांची स्थित महालेखाकार कार्यालय भेजा गया है और वहां से पत्र आने पर ही आगे की कार्रवाई होगी। लंबा इंतजार करने के बाद जब वे स्वयं रांची एजी ऑफिस पहुंचीं तो अधिकारियों ने कहा कि उनका कार्य लातेहार शिक्षा कोषागार स्तर से ही होना है। इसके बाद लातेहार कोषागार ने फिर से बैंक जाने को कहा, जबकि बैंक प्रबंधन ने पुनः कोषागार जाने की सलाह दी। इस तरह पिछले पांच महीनों से वह बैंक, कोषागार और अन्य कार्यालयों के बीच चक्कर काट रही हैं।
आदिम जनजाति समुदाय से आने वाली महेश्वरी देवी ने प्रशासन से मानवीय आधार पर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “एक विधवा के लिए बार-बार 60-80 किमी दूर लातेहार और रांची आना-जाना बहुत कठिन है। यदि कार्यालय आपस में समन्वय कर लें तो मेरी समस्या तुरंत हल हो सकती है।” यह मामला ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को दर्शाता है। उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर महेश्वरी देवी की पेंशन प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराएगा, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके और सिस्टम पर उनका भरोसा बना रहे।

