लोकसभा: हंगामे के कारण कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित, रीजीजू ने कहा शाह का जवाब नहीं सुन पाएगा विपक्ष

लोकसभा में अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे से कार्यवाही बाधित हुई, जबकि एमएसएमई संशोधन विधेयक बिना चर्चा पारित हुआ।

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नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे के बीच ही सदन ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा के बिना पारित किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ये लोग गृह मंत्री के नाम से नारे लगाकर सदन से चले जाते हैं, लेकिन जब गृह मंत्री अमित शाह सदन में चर्चा का जवाब देंगे तो विपक्ष सुन नहीं पाएगा।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान विपक्ष के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के बीच ही सदन ने विधेयक को चर्चा के बिना पारित कर दिया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री रीजीजू ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘ये लोग आज भी सवेरे से गृह मंत्री का नाम ले-लेकर नारे लगा रहे हैं। ये लोग हंगामा करके गायब हो जाते हैं। गृह मंत्री अमित शाह सुबह-सुबह संसद में आते हैं और देर रात को ही वापस जाते हैं। वह दिनभर संसद में ही रहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अमित शाह वह व्यक्ति हैं जिनका नाम सुनकर सारे आतंकवादी, उग्रवादी कांप उठते हैं। जिस दिन यहां चर्चा होगी, गृह मंत्री अमित शाह जब यहां जवाब देंगे तो आप लोग सुन नहीं पाएंगे। क्या गृह मंत्री का नाम लेते हो।’’ रीजीजू ने यह भी कहा कि नियम कहता है कि जो विधेयक होता है, उसी से संबंधित मंत्री को सदन में आना होता है। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आप यहां निर्देश नहीं दे सकते कि कौन से मंत्री आएंगे और किसको जवाब देना है। वह सरकार और आसन तय करते हैं। आप लोग सदन को बाधित करने और देश को गुमराह करने का नाटक बंद कीजिए।’’ इसके बाद पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने विपक्षी दलों के सदस्यों से कार्यवाही चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘आप मन बनाकर आए हैं कि सदन चलने नहीं देंगे। यह सही नहीं है।’’ इसके बाद उन्होंने कार्यवाही सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक स्थगित कर दी।

इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आगामी नौ अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया और सदन ने कुछ क्षण मौन रखकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया तब विपक्ष के सांसद अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की अपनी मांग दोहराते हुए नारे लगा रहे थे। बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन के संदर्भ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए विपक्षी सांसदों से उनसे प्रेरणा लेने को कहा।

अध्यक्ष ने कहा, ‘‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का योगदान भारत ही नहीं, पूरी दुनिया मानती है और उनसे प्रेरणा लेती है। आप सब भी उनसे प्रेरणा लो और देश के अंदर लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करने के लिए चर्चा, संवाद करो तथा अपने विचारों को अभिव्यक्त करो।’’ उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है और उसे चलने देना चाहिए। बिरला ने कहा, ‘‘बाबा साहेब आंबेडकर ने यह विचार दिया था कि देश के अंदर लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करना है तो चर्चा और संवाद ही इसका रास्ता है। मैं हर बार आप सबसे आग्रह करता हूं लेकिन आपका आचरण संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। आपको इस पर विचार करना चाहिए।’’ इसके बाद हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे की स्थिति के कारण आज लगातार 15वें दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।