CEO अनुराधा तिवारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर मचा बवाल

बेंगलुरु की एक कंपनी की CEO अनुराधा तिवारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल मच गया है। वह अकसर आरक्षण का विरोध करती रहती हैं। अब उन्होंने एक्स पर अपनी तस्वीर Post की जिसमें वह मसल्स दिखा रही थीं।

News Aroma
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Chaos over CEO Anuradha Tiwari’s social media Post: बेंगलुरु की एक कंपनी की CEO अनुराधा तिवारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल मच गया है। वह अकसर आरक्षण का विरोध करती रहती हैं। अब उन्होंने एक्स पर अपनी तस्वीर Post की जिसमें वह मसल्स दिखा रही थीं।

साथ ही उन्होंने कैप्शन में ब्राह्मण जीन्स लिख दिया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह कि टिप्पणियां की हैं। इस पोस्ट को लाखों लोग देख चुके हैं। अनुराधा एक Content Marketing Company की फाउंडर और सीईओ हैं। तिवारी की तस्वीर में देखा जा सकता है कि वह स्कूटी के पास खड़ी हैं और उनके हाथ में नारियल है।

वह अपने हाथ की मशल्स दिखा रही हैं। तिवारी की इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा, लड़कियों के शॉर्ट्स पहनने और फोटो पोस्ट करने को लेकर मुस्मृति में क्या कहा गया है? आखिर ब्राह्मण उसका पालन क्यों नहीं करते हैं?अगस्त 2022 की एक पोस्ट में उन्होंने कहा था, मैं एक सामान्य वर्ग से आने वाली छात्रा हूं। मेरे पूर्वजों ने मुझे एक एकड़ जमीन भी नहीं दी। मैं किराए के मकान में रहती थी। 95 फीसदी अंक लाने के बाद भी मुझे ऐडमिशन नहीं मिला और 60 प्रतिशत वाले मेरे साथियों को मिल गया।

अब आप पूछते हैं कि आरक्षण से दिक्कत क्या है? हाल के पोस्ट को लेकर अनुराधा तिवारी ने सोशल मीडिया पर कहा, उम्मीद के मुताबिक ब्राह्मण शब्द बोलते ही बहुत सारे लोगों का डर सामने आ गया। इन लोगों ने बता दिया कि असल जातिवाद क्या है। सिस्टम से अनारक्षितों को कुछ नहीं मिलता। हमें सब कुछ खुद से कमाना है और यह भी गर्व की बात है।

Supreme Court के वकील शशांक रतनू ने कहा, अब भी जातिवाद कूट-कूटकर भरा हुआ है। फिट रहना अच्छी बात है लेकिन कोई विशेष जीन्स का बताकर खुद को सर्वश्रेष्ठ बताना ठीक नहीं है। इस तरह से देश एक परिवार नहीं बन सकता।

बता दें कि तिवारी अकसर सोशल मीडिया पर अपने विचार रखती हैं और उनपर जमकर बहस भी होती है। हाल ही में उन्होंने आरक्षण को लेकर कहा था, सामान्य वर्ग को भी विश्वास होना चाहिए कि यह देश उनका भी है। केवल आरक्षण वालों का नहीं है। आज की रजनीति केवल आरक्षित जातियों पर केंद्रित है। यह मेहनत करने वाले सामान्य वर्ग के लोगों के साथ बड़ा अन्याय है। एक राष्ट्र कभी मेहनत करने वालों के साथ अन्याय नहीं कर सकता।

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