विदेशी टीकों को लेकर उच्चतम स्तर पर कोशिश किए जा रहे: केन्द्र

नई दिल्ली: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि वह विदेशी कोविड के टीके खरीदने के लिए उच्चतम स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत में 380 पन्नों के एक हलफनामे में कहा कि वैक्सीन की उपलब्धता को और बढ़ाने और विदेशी निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए, भारत के भीतर विदेशी टीकों के उपयोग के लिए नियामक प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया गया है।

केंद्र ने बताया कि कोविड-19 के वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी) ने सिफारिश की है कि कोरोना टीके, जिन्हें विदेशों द्वारा विकसित किया गया है और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित उपयोग के लिए आपातकालीन स्वीकृति भी दी गई है, उसको भारत में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी जा सकती है।

इस सूची में यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, जापान या डब्ल्यूएचओ (आपातकालीन उपयोग सूची) में सूचीबद्ध है।

केंद्र ने तर्क दिया कि टीकाकरण अभियान को बढ़ावा मिलेगा यदि यह भारत के बाहर उपलब्ध टीकों जैसे फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्न आदि के टीकों की खरीद के अपने प्रयासों में सफल होता है।

हलफनामे के अनुसार, यह प्रस्तुत किया जाता है कि इन टीकों की खरीद के उद्देश्य से विदेश में, देश में सर्वोच्च राजनीतिक कार्यकारी के स्तर पर और उच्चतम राजनयिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।

विदेशी वैक्सीन निमार्ताओं ने क्षतिपूर्ति दिए जाने के बाद ही विश्व स्तर पर अपने कोविड-19 टीकों की आपूर्ति की है। हालांकि, भारत ने अभी तक किसी वैक्सीन निमार्ता को क्षतिपूर्ति नहीं दी है।

क्षतिपूर्ति क्षति या हानि के लिए बीमा क्षतिपूर्ति का एक व्यापक रूप है। कानूनी तौर पर, यह नुकसान के लिए देयता से छूट को संदर्भित करता है।

फाइजर और मॉडर्न कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए उन देशों से क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं जहां वे टीकों की आपूर्ति करते हैं।

इसका अर्थ है कि टीकाकरण के बाद किसी भी प्रतिकूल घटना के कारण कंपनियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। फाइजर ने यूके और यूएस में क्षतिपूर्ति प्राप्त की है।

कथित तौर पर, भारत क्षतिपूर्ति अनुरोध की जांच कर रहा है और यह इन निमार्ताओं द्वारा मांगे गए कानूनी संरक्षण को अपने टीकाकरण अभियान का विस्तार करने के लिए प्रदान कर सकता है।

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