
देशभर में भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है और 25 मई से शुरू हुए नौतपा ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। हिंदू पंचांग और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। यह स्थिति 2 जून तक बनी रहेगी। इन दिनों कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, जिससे घरों में एसी और कूलर तक बेअसर साबित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नौतपा के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। हीटवेव का असर सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
क्यों खतरनाक होती है नौतपा की गर्मी?
भीषण गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी तेजी से होने लगती है। ज्यादा पसीना निकलने से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि लगातार सांस फूल रही हो, सीने में दर्द हो, होंठ नीले पड़ने लगें या अचानक बेहोशी महसूस हो, तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।
इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा
नौतपा की गर्मी सभी के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, लेकिन कुछ लोग हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से अस्थमा, सीओपीडी (COPD), डायबिटीज, किडनी या हार्ट डिजीज से पीड़ित मरीज शामिल हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बुजुर्गों और बच्चों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है। वहीं, दिल के मरीजों में तेज गर्मी के कारण हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है।
फेफड़ों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
हीटवेव के दौरान गर्म और शुष्क हवा फेफड़ों को प्रभावित करती है, जिससे सांस लेने की गति तेज हो जाती है। डिहाइड्रेशन के कारण खून गाढ़ा होने लगता है और शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, लगातार गर्मी झेलने से लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव, थकान और नींद की समस्या भी बढ़ने लगती है। इसलिए इस मौसम में मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
हीटवेव से बचने के जरूरी उपाय
शरीर को रखें हाइड्रेटेड
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, चाहे प्यास लगे या नहीं। नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे पेय पदार्थ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
खान-पान का रखें ध्यान
तरबूज, खरबूजा, खीरा और दही जैसी ठंडी चीजों को डाइट में शामिल करें। तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना खाने से बचें।
सही कपड़े पहनें
बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें। सिर को टोपी, गमछे या छाते से ढककर रखें।
इन बातों से करें परहेज
दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ाते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को हीटवेव के दौरान सांस लेने में दिक्कत, चक्कर या बेहोशी महसूस हो, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।

