वांगचुक, कॉजपा के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई के विरोध में मुंबई विश्वविद्यालय के बाहर राकांपा (शप) का प्रदर्शन

मुंबई में राकांपा-शरदचंद्र पवार के कार्यकर्ताओं ने कॉजपा मार्च पर पुलिस कार्रवाई, सोनम वांगचुक को हटाने और नीट विवाद को लेकर प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) ने संसद की ओर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई और अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के विरोध में सोमवार को मुंबई विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। राकांपा (शप) कार्यकर्ताओं ने शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की। राकांपा (शप) की मुंबई इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मिलिंद अन्ना कांबले, पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष अमोल माटेले और वैभव गोधावे के नेतृत्व में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल कार्यकर्ताओं और छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

कांबले ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने केंद्र सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना चाहिए। कांबले ने कहा, “अगर सरकार कार्रवाई करने में नाकाम रहती है, तो देश का युवा लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगा और सरकार को जवाबदेह ठहराएगा।” राकांपा (शप) ने वांगचुक को जंतर-मंतर से “जबरन” हटाए जाने की भी आलोचना की। वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं और इसके कारण छात्रों की कथित आत्महत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉजपा के प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर हैं। दिल्ली पुलिस उन्हें शनिवार को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई।

माटेले और गोधावे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार “लोकतांत्रिक ढंग से किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों का दमन” नहीं रोकती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। राकांपा (शप) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे नवी मुंबई में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र “लीक” से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और वे निराशा के गहरे गर्त में धकेल दिए गए। शिंदे ने आरोप लगाया कि इसके कारण 21 मेडिकल अभ्यर्थियों ने अपनी जान दे दी। उन्होंने कहा कि घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार और प्रशासन ने वांगचुक के साथ ऐसा व्यवहार किया, जिसपर एक तानाशाह भी शर्मिंदा हो जाए। शिंदे ने कहा, “राकांपा (शप) ने राजग सरकार के बेरहम, गैर-जिम्मेदार और असंवेदनशील रवैये के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया है।” उन्होंने आरोप लगाया, “यह सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती है, न्याय के लिए उनकी लड़ाई को दबाती है और जानबूझकर उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है।”

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।